योगी सरकार का बड़ा एक्शन, UP Recruitment Scam की जांच का आदेश, तीन सदस्यीय समिति गठित
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में अनियमितताओं के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में हुए एक गंभीर नियुक्ति घोटाले की जांच के आदेश दिए गए हैं, जिससे प्रदेश में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाले इस UP Recruitment Scam की परतें खुलेंगी। यह मामला सिर्फ वर्तमान नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुई भर्तियों को भी जांच के दायरे में लाया गया है। इस कार्रवाई से उन अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, जो इस फर्जीवाड़े में शामिल रहे हैं और जनता के भरोसे को तोड़ा है।
शासन ने एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति को मुख्य रूप से वर्ष 2016 में हुई एक्सरे-टेक्नीशियन भर्ती की बारीकी से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, समिति वर्ष 2008 में हुई नियुक्तियों के दस्तावेजों को भी खंगालेगी। निदेशक प्रशासन चिकित्सा स्वास्थ्य की अध्यक्षता वाली इस समिति में निदेशक पैरामेडिकल और निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम भी शामिल हैं। समिति को विज्ञापन जारी होने से लेकर अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग तक की हर फाइल की जांच करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। जांच का मुख्य फोकस यह होगा कि चयन सूची में शामिल नामों से अधिक लोग जिलों में कैसे तैनात हो गए और इस पूरे फर्जीवाड़े का असली मास्टरमाइंड कौन है।
प्रदेश में एक्सरे-टेक्नीशियनों की भर्ती के दौरान हुई इस गड़बड़ी ने सबको चौंका दिया था। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, विज्ञापित पदों और चयनित अभ्यर्थियों की संख्या से कहीं अधिक लोगों ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में ज्वाइनिंग कर ली थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई फर्जी तरीके से भर्ती हुए लोग अभी भी विभिन्न सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और सरकारी खजाने से वेतन ले रहे हैं। जांच की सुगबुगाहट तेज होते ही कई संदिग्ध कर्मचारी कार्रवाई के डर से ड्यूटी छोड़कर फरार भी हो गए हैं। अब समिति यह भी देखेगी कि महानिदेशालय स्तर पर किन अधिकारियों ने इन फर्जी नियुक्तियों को संरक्षण दिया।
शासन ने इस जांच के लिए एक कड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। समिति को दो माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच के दौरान आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी, साक्षात्कार के लिए बुलाए गए अभ्यर्थियों की सूची और वास्तव में जारी किए गए नियुक्ति पत्रों का मिलान किया जाएगा। यदि चयन परिणाम और ज्वाइनिंग डेटा में अंतर पाया जाता है, तो उस समय तैनात रहे संबंधित जिलों के अधिकारियों और महानिदेशालय के बाबुओं पर सीधी कार्यवाही की जाएगी। समिति को न केवल भ्रष्टाचार को उजागर करना है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्यवाही की स्पष्ट संस्तुति भी करनी है ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।
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