लखनऊ: मोबाइल पर घंटों रील देखने से बढ़ रहा ‘Tech Neck’ का खतरा, युवा सबसे ज्यादा प्रभावित
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल, खासकर घंटों तक रील देखने की आदत, युवाओं की गर्दन पर भारी पड़ रही है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हड्डी रोग विभाग और फिजियोथेरेपी यूनिट के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में गर्दन दर्द की शिकायत लेकर 1500 मरीज अस्पताल पहुंचे। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मरीजों की समस्या का मुख्य कारण लंबे समय तक मोबाइल का उपयोग करना पाया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक, 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवा और युवतियां इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। लगातार स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रखने और गर्दन झुकाकर बैठने से सर्वाइकल स्पाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मांसपेशियों में जकड़न, सिरदर्द, कंधों में दर्द और हाथों में झनझनाहट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। शेष 40 प्रतिशत मरीजों में गर्दन दर्द का कारण बढ़ती उम्र, गठिया या अन्य चिकित्सीय स्थितियां थीं।
KGMU के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि मोबाइल का उपयोग करते समय शरीर की सही मुद्रा न अपनाना एक बड़ी समस्या है। कई युवा पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया के लिए दिन में छह से आठ घंटे तक स्क्रीन पर बिता रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से मनपसंद रील और वीडियो लगातार स्क्रीन पर आते रहते हैं, जिससे लोगों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर सर्वाइकल रोग का रूप ले सकती है।
फिजियोथेरेपी यूनिट के रवीन्द्र ने बताया कि गर्दन दर्द का एक बड़ा कारण मोबाइल का अत्यधिक उपयोग है। समय पर डॉक्टर की सलाह और फिजियोथेरेपी आवश्यक है। इलाज में लापरवाही से परेशानी बढ़ सकती है, जिससे हाथों में झनझनाहट, कमजोरी या तेज सिरदर्द हो सकता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि हर 30 मिनट बाद ब्रेक लें, मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें, नियमित रूप से गर्दन व कंधों के व्यायाम करें और अनावश्यक सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग से बचें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक और हल्का व्यायाम कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करेगा। काम करते समय कुर्सी और मेज की ऊंचाई सही रखना और गर्म सिकाई या हल्की मालिश भी फायदेमंद हो सकती है।
