बांग्लादेश चुनाव: BNP की रिकॉर्ड जीत, तारिक रहमान बनेंगे प्रधानमंत्री, जानें क्यों नहीं मना जश्न
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के लगभग डेढ़ साल बाद हुए चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार बहुमत हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत के बावजूद, राजधानी ढाका की सड़कें सूनी रहीं और कहीं भी जश्न का माहौल या विजय जुलूस देखने को नहीं मिला। BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संयम बरतने का आह्वान किया है।
चुनाव परिणामों से तीन मुख्य बातें स्पष्ट हुई हैं: तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे, कट्टरपंथी मानी जाने वाली जमात पार्टी की धार्मिक राजनीति को जनता ने नकार दिया है, और शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों को अपनी राजनीतिक जगह बनाने के लिए अभी और संघर्ष करना होगा।
BNP की जीत के पीछे के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, BNP की इस रिकॉर्ड जीत के पीछे हिंदू मतदाता, शेख हसीना की अवामी लीग के कुछ समर्थक और महिला मतदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लोगों ने नई सरकार से भ्रष्टाचार खत्म करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और कानून-व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई है।
जमात समर्थकों का निराशाजनक रुख
ढाका में जमात के कार्यालय में मौजूद समर्थक चुनाव परिणामों से मायूस दिखे। उनका मानना है कि चुनाव में धांधली हुई है। एक कट्टर समर्थक रेजा अल करीम ने कहा कि उन्हें शक है कि नतीजों में हेरफेर किया गया है, क्योंकि मतदान के अंतिम घंटों में बैलेट बॉक्स छीनने और फर्जी वोट डालने की कोशिशें की गईं। एक अन्य कारोबारी मुफज्जल हुसैन ने बताया कि शुरुआती रुझानों में जमात-ए-इस्लामी आगे चल रही थी, लेकिन रात 11 बजे के बाद नतीजे अचानक बदल गए।
आम जनता और अवामी लीग समर्थकों की प्रतिक्रिया
आम लोगों ने BNP की जीत पर खुशी जताई है। रिक्शा चालक मोहम्मद सुहैल ने कहा कि BNP की जीत बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी थी और देश में कानून-व्यवस्था में सुधार होना चाहिए ताकि लोग सुरक्षित महसूस कर सकें। अवामी लीग के समर्थक मोहम्मद सबुज भुइया भी BNP की जीत से खुश दिखे। उन्होंने कहा कि उन्हें जमात के लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं और उम्मीद है कि अब डर का माहौल कम होगा।
हिंदू मतदाताओं की भूमिका
ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र नेता दीपांकर चंद्र शील, जो बांग्लादेश हिंदू बौद्ध छात्र एकता परिषद के सचिव भी हैं, ने कहा कि चुनाव नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि जमात जैसी पार्टियां धर्म के आधार पर देश को नहीं बांट सकतीं। उन्होंने तारिक रहमान को बांग्लादेश के लिए सबसे अच्छा नेता बताया और मांग की कि अल्पसंख्यकों पर हुए जुल्म की जांच कराई जाए ताकि सभी लोग बिना डर के रह सकें।
छात्र आंदोलन के नेताओं की हार
शेख हसीना के खिलाफ छात्र आंदोलन में शामिल रहे फाहिम मसूम ने बताया कि आंदोलन से उभरे कई छात्र नेताओं ने सत्ता में आने के बाद अपने स्वार्थ के लिए काम किया। छात्रों की पार्टी NCP, जिसने जमात का समर्थन किया था, चुनाव में बुरी तरह हारी, उसके 30 में से केवल 6 उम्मीदवार ही जीत पाए।
