कानपुर में एक चार साल पुराने जमीन विवाद को लेकर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बुधवार को जूही थाने में गहन समीक्षा की। यह मामला लंबे समय से लंबित था और दोनों पक्ष लगातार पुलिस...
कानपुर में एक चार साल पुराने जमीन विवाद को लेकर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बुधवार को जूही थाने में गहन समीक्षा की। यह मामला लंबे समय से लंबित था और दोनों पक्ष लगातार पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायतें दर्ज करा रहे थे। कमिश्नर ने मौके पर पहुंचकर मामले की वस्तुस्थिति को समझा और दोनों पक्षों से बातचीत की।
किदवई नगर निवासी अमित कुमार शर्मा का आरोप है कि जूही खुर्द स्थित 618 वर्ग गज के उनके प्लॉट पर कब्जा करने के लिए वर्ष 2018 में फर्जी ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस संबंध में उन्होंने भानु प्रकाश बाजपेई समेत नौ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में भानु प्रकाश बाजपेई को जेल भी भेजा गया था।
दूसरी ओर, भानु प्रकाश बाजपेई ने भी न्यायालय के आदेश पर जूही थाने में अधिवक्ता अमित शर्मा, उनके पिता हरिकिशन और मां मीणा के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। वर्तमान में यह मामला अदालत के निर्देश पर पुनः विवेचना के अधीन है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगा रहे थे, जिसके कारण पुलिस कमिश्नर ने स्वयं हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया।
पुलिस कमिश्नर ने सबसे पहले विवेचक से जांच की प्रगति की जानकारी ली। इसके बाद वादी अमित कुमार शर्मा और आरोपी भानु प्रकाश बाजपेई से अलग-अलग बातचीत की गई। बाद में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनके बयान दर्ज किए गए और संबंधित दस्तावेज भी तलब किए गए। पूछताछ और सुनवाई का यह सिलसिला करीब दो घंटे तक चला।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि भानु प्रकाश बाजपेई ने बार के महामंत्री राकेश तिवारी पर भी आरोप लगाया था कि उनकी वजह से ही भानु को जेल जाना पड़ा, लेकिन वे आरोप पुष्ट नहीं हो सके। साथ ही अभी तक की जांच में भानु का जमीन पर कोई मजबूत पक्ष भी सामने नहीं आया है।
इस बीच, पुलिस कमिश्नर के जूही थाने पहुंचने की सूचना पर दोनों पक्षों ने अपना दावा मजबूत करने की कोशिश की। एक पक्ष ने अधिवक्ता अमित कुमार शर्मा की हिस्ट्रीशीट सोशल मीडिया पर वायरल करा दी। हालांकि पुलिस कमिश्नर ने कहा कि किसी के हिस्ट्रीशीटर होने से यह साबित नहीं हो जाता कि उसके साथ कोई अपराध नहीं हो सकता।