अखिलेश यादव के आरोपों पर UP Election Commission का एक्शन, कहा- फॉर्म-7 की सुनवाई के बाद ही कटेंगे नाम
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अखिलेश ने आरोप लगाया था कि राज्य में मतदाता सूची से एक करोड़ नाम काटे जा रहे हैं। सीईओ रिणवा ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 पर पारदर्शी ढंग से सुनवाई के बाद ही सभी जिलों में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) नाम काटेंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पूरी जांच प्रक्रिया का पालन करें और मतदाता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से नाम काटने के लिए की जा रही आपत्तियों की निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मृतकों तक के नाम पूरी जांच प्रक्रिया के बाद ही काटे जाने का प्रावधान है। सभी ईआरओ आपत्ति करने वाले व्यक्ति और संबंधित मतदाता, जिसका नाम काटने के लिए फॉर्म-7 भरा गया है, दोनों को नोटिस भेजकर बुला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक कुल 1.15 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटने के लिए आपत्तियां करते हुए फॉर्म-7 भरे गए हैं। ऐसे में एक करोड़ नाम काटे जाने का आरोप सही नहीं है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठकर आईएएस अधिकारी बीएलओ को धमका रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वोटरों के नाम काटने के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों में छपे हुए फ़ार्म-7 भरकर भेज दिए गए हैं। अखिलेश ने दावा किया था कि भाजपा हर विधानसभा में 10 हजार वोट कटवाना चाहती है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अभी तक 1.15 लाख मतदाताओं के नाम सूची से कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरे गए हैं। इसमें से मात्र 234 ही राजनीतिक दलों की ओर से भरे गए हैं। बीजेपी ने 173, सपा ने 47, आप ने आठ और बसपा ने छह फॉर्म-7 भरे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि 6 फरवरी दावे व आपत्तियों की अंतिम तारीख है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चल रही है।
