अलीगढ़ में नीरज और शहरयार के नाम हुई शाम, गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश, Aligarh news
अलीगढ़ में हिंदी और उर्दू की साझा तहज़ीब, भाईचारे और साहित्यिक विरासत को समर्पित कार्यक्रम “एक शाम नीरज–शहरयार के नाम” का आयोजन कृष्णांजलि मंच पर किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी और उर्दू के बीच की साझा संस्कृति को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के संयोजक गुलज़ार अहमद ने कहा कि जिस तरह अलीगढ़ में नीरज और शहरयार को समान श्रद्धा से याद किया जाता है, वही मिसाल गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी रहीस कुरैशी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में एएमयू के पूर्व कुलपति और एमएलसी तारिक मंसूर मौजूद रहे। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया। इसके अलावा पूर्व मेयर मोहम्मद फुरकान, मोहम्मद रईस, जॉनी फास्टर, नदीम नवीन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में असलम विशाल ने नीरज के गीतों की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। जॉनी फास्टर ने अलीगढ़ पर आधारित अपनी कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर मिस्कात, अध्यक्ष हिंदी विभाग टीकाराम कन्या विद्यालय ने किया। इस मौके पर मोहम्मद शहरोज, मोहम्मद तारीख, इनामुल हक, मुजाहिद कादरी, मोहम्मद रेहान, नौशाद कुरैशी, मोहम्मद फहीम, मोहम्मद नईम, सलीम कुरैशी, मोहसिन, दिलशाद शाह आदि मौजूद रहे।
