1857 के शहीदों को सम्मान का इंतजार: Ajnala के कुएं में मिले 282 सैनिकों के अवशेष, 10 साल बाद भी अनदेखी
पंजाब के अजनाला शहर में एक गुरुद्वारे के परिसर में स्थित कुआं ‘शहीदों का कुआं’ या ‘कलियांवाला खोह’ के नाम से जाना जाता है। इस कुएं में 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों द्वारा मारे गए 282 भारतीय सैनिकों के अवशेष पाए गए थे। 2014 में खुदाई के दौरान इन अवशेषों को निकाला गया था, लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी इन शहीदों को उचित सम्मान नहीं मिल पाया है। वर्तमान में ये अवशेष लोहे के बक्से में बंद रखे हैं और सरकार की ओर से इनके अंतिम संस्कार या संग्रहालय में रखने की कोई पहल नहीं की गई है।
1857 के नरसंहार की कहानी
यह नरसंहार 1857 के विद्रोह के दौरान हुआ था। उस समय अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर फ्रेडरिक हेनरी कूपर ने 26वीं नेटिव इन्फैन्ट्री बटालियन के 282 सैनिकों को पकड़ लिया था। इन सैनिकों को अजनाला के पास एक सूखे कुएं में जिंदा दफना दिया गया था। कूपर ने अपनी किताब ‘द क्राइसिस इन द पंजाब’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र किया था।
इतिहास के पन्नों से खोज
इस नरसंहार की कहानी को सुरेंद्र कोछड़ नामक एक व्यक्ति ने खोजा था। उन्हें अमृतसर की एक लाइब्रेरी में कूपर की किताब मिली, जिसमें इस घटना का वर्णन था। 11 साल की लंबी पड़ताल के बाद, जिसमें उन्होंने पुरानी पत्रिकाओं और स्थानीय लोगों के बयानों का सहारा लिया, उन्होंने उस कुएं की पहचान की। 2014 में खुदाई के बाद कंकाल मिले, जिससे यह ऐतिहासिक घटना प्रमाणित हुई।
सरकारी अनदेखी और विरोधाभास
इन शहीदों के अवशेष मिलने के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों ने इनके सम्मान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। शर्मनाक बात यह है कि जिस अंग्रेज अफसर फ्रेडरिक हेनरी कूपर ने इस नरसंहार को अंजाम दिया था, उसके नाम पर अमृतसर में आज भी ‘कूपर रोड’ मौजूद है। विभिन्न सरकारों (कांग्रेस, अकाली-भाजपा, आप) के सत्ता में आने के बावजूद, इन शहीदों को सम्मानजनक स्थान नहीं मिला है।
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