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पुरी जगन्नाथ मंदिर के निर्माता राजा नहीं, शिल्पी ‘पल्ल’: नई रिसर्च का चौंकाने वाला खुलासा

By Jan 25, 2026

ओडिशा के पुरी में स्थित विश्वविख्यात भगवान जगन्नाथ के श्रीमंदिर के निर्माण इतिहास को लेकर एक अहम और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। हालिया शोध में यह दावा किया गया है कि पुरी श्रीमंदिर के प्रथम निर्माता राजा नहीं, बल्कि ‘पल्ल’ नामक एक शिल्पी थे। यह जानकारी प्राचीन शिलालेखों और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर सामने आई है, जिसने अब तक प्रचलित ऐतिहासिक धारणाओं को नई दृष्टि दी है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह महत्वपूर्ण तथ्य नृसिंह मंदिर परिसर के समीप प्राप्त एक प्राचीन शिलालेख से सामने आया है। शिलालेख की शुरुआती पंक्तियों में संस्कृत भाषा में उल्लेख है कि नव पुरुषोत्तम निलय यानी श्रीमंदिर के निर्माण कार्य में ‘कुलपुत्र पल्ल’ की प्रमुख भूमिका थी। अभिलेख में पल्ल को कर्मकार कुल से संबंधित बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह एक उच्च कोटि के शिल्पी और वास्तुकार थे।

अब तक मान्यता रही है कि 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंगभीम देव तृतीय ने वर्तमान श्रीमंदिर का निर्माण कराया था। हालांकि, नया शोध यह स्पष्ट करता है कि राजकीय संरक्षण भले ही रहा हो, लेकिन वास्तविक निर्माण योजना, शिल्प और प्रारंभिक ढांचा तैयार करने का श्रेय शिल्पी ‘पल्ल’ को जाता है। शोधकर्ता दीपक कुमार नायक के अनुसार, यह शिलालेख न केवल श्रीमंदिर के निर्माण काल को समझने में सहायक है, बल्कि उस दौर की शिल्प परंपरा, कर्मकार समाज और मंदिर वास्तुकला पर भी नई रोशनी डालता है।

इतिहासकारों का मानना है कि यह खोज ओडिशा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि श्रीमंदिर जैसे भव्य धार्मिक स्थल के निर्माण में स्थानीय शिल्प परंपरा और कर्मकार समुदाय की भूमिका कितनी अहम रही है। इस नए खुलासे के बाद श्रीमंदिर के निर्माण इतिहास को लेकर पुनर्मूल्यांकन और आगे के शोध की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अन्य अभिलेखों और ताम्रपत्रों का भी गहन अध्ययन किया जाए, तो श्रीमंदिर के इतिहास से जुड़े और कई अनछुए तथ्य सामने आ सकते हैं।

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