बिहार सरकार का बड़ा फैसला: बेहतर प्रदर्शन वाले बैंकों से ही होगा सरकारी लेन-देन, खराब बैंकों पर कार्रवाई
बिहार सरकार ने राज्य के प्रति बैंकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य-स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 95वीं बैठक में यह घोषणा की गई कि अब बैंकों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी रैंकिंग की जाएगी। इस नई प्रणाली के तहत, सरकार केवल उन्हीं बैंकों के साथ अपना वित्तीय लेन-देन करेगी जो बेहतर प्रदर्शन करेंगे। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने स्पष्ट किया कि खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों से सरकारी कारोबार बंद कर दिया जाएगा।
इस पहल के साथ ही, विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन भी किया जाएगा। यह समिति बैंकों की कार्यप्रणाली और उनकी उपलब्धियों की बारीकी से निगरानी करेगी। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए बैंकों से बिहार के विकास में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में बैंकों द्वारा की जा रही उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की और क्रेडिट-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) में सुधार लाने के निर्देश दिए। बिहार का सीडी रेशियो वर्तमान में 58.17 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 84.32 प्रतिशत से काफी कम है।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वार्षिक साख योजना (एसीपी) के तहत लक्ष्य की तुलना में केवल 42.59 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) में बैंकों की कम रुचि पर भी सवाल उठाए गए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन भी संतोषजनक नहीं रहा है, जिसमें केवल 11 बैंकों को 40 से अधिक अंक मिले हैं। आनंद किशोर ने कहा कि अब प्रदर्शन में खरा नहीं उतरने वाले बैंकों से सरकार कोई कारोबार नहीं करेगी और उन्हें सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार के लोगों की जमा राशि का दूसरे राज्यों में स्थानांतरण एक गंभीर मुद्दा है जिस पर बैंकों को ध्यान देना चाहिए।
