उत्तर प्रदेश में धरोहरों के संरक्षण के लिए ‘स्मारक मित्र’ चयनित, पर्यटन को मिलेगी बढ़ावा
उत्तर प्रदेश में संस्कृति विभाग ने ‘एडाप्ट हेरिटेज पॉलिसी’ के तहत प्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इसके अंतर्गत, प्रथम चरण में कई मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों के लिए ‘स्मारक मित्रों’ का चयन पूरा कर लिया गया है। दूसरे चरण में 10 अन्य स्मारकों को भी इस नीति के दायरे में लाया जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस पहल के माध्यम से राज्य संरक्षित गोपीनाथ मंदिर वृन्दावन, पोत्राकुण्ड मथुरा, विगारा की गढ़ी झांसी, लक्ष्मी मंदिर झांसी, कुसुमवन सरोवर मथुरा, रसखान की समाधि मथुरा, बाल्मीकि आश्रम बिठूर, शिव मंदिर का तालाब मूरतगंज कौशाम्बी, टिकैतराय शिव मंदिर बिठूर, सारनाथ मंदिर, दरबाग मिर्जापुर, गोवर्धन मंदिर, लरवाक मिर्जापुर और गुरुधाम मंदिर वाराणसी जैसे प्रमुख स्थलों को ‘स्मारक मित्रों’ के संरक्षण में सौंपा गया है।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य प्राचीन और ऐतिहासिक स्थलों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करना है। साथ ही, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास करना भी शामिल है। मंत्री ने विश्वास जताया कि इससे न केवल इन स्थलों पर आने वाले आगंतुकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।
