ज्योतिर्मठ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन से विवाद, जानिए पूरा मामला
प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए ज्योतिर्मठ के विवादित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के संगम घाट तक रथ पर या पैदल जाने को लेकर प्रशासन से तकरार के चार दिन बीत चुके हैं। यह विवाद अब बवाल का रूप ले चुका है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस पर भगदड़ मचाकर उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप भी लगा दिया है।
प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस देकर खुद को शंकराचार्य कहने पर जवाब मांगा था। जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकराचार्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे का हवाला देते हुए नोटिस को अवमानना बता दिया है और उसे वापस लेने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
देश-दुनिया के मसलों पर खुलकर अपनी राय रखने वाले अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच तकरार पर साधु-संत समाज और राजनेता बंटे हुए हैं। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि रथ पर बैठकर स्नान के लिए नहीं जाना चाहिए था, क्योंकि यह शास्त्र के विरुद्ध है। कई संत इसे सनातन का अपमान बता रहे हैं। समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव सक्रियता से मसले को उठाकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को घेरने की कोशिश में जुटे हैं। यह अलग बात है कि 2015 में सपा सरकार के दौरान भी यूपी पुलिस ने इनको पीटा था।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में उमाशंकर पांडेय के रूप में हुआ था। उनकी धर्म शास्त्र में दिलचस्पी बचपन से थी। गुजरात में स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी राम चैतन्य से मुलाकात के बाद वो संस्कृत और शास्त्रों के अध्ययन में जुट गए। वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त करने के बाद वो छात्र राजनीति में उतरे और 1994 में यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीते।
स्वामी करपात्री महाराज की छाया में वेद, पुराण, उपनिषद में पारंगत होने के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया। ब्रह्मचारी दीक्षा ग्रहण करने के बाद वो ब्रह्मचारी आनंद स्वरूप बने। फिर जब शंकराचार्य से दंडी दीक्षा प्राप्त की तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बने। 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य घोषित किया गया। उनकी शंकराचार्य पदवी पर कानूनी विवाद है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धर्म से बाहर समाज और राजनीति के मसलों पर मुखर होकर खूब बोलते हैं। गंगा और गौहत्या को लेकर वो अभियान भी चलाते रहे हैं। मंदिरों में साईं बाबा की मूर्ति के वो घनघोर विरोधी हैं। उन्होंने 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर के उद्घाटन का विरोध किया था और कहा था कि अधूरे मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा गलत है। यह विवाद आम जनता के धार्मिक विश्वासों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच संतुलन की आवश्यकता को दर्शाता है।
