विधायिका के लिए रियल एआई की जरूरत: हरिवंश ने संसदीय AI टूल पर दिया जोर
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विधायिका के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए ‘रियल एआई’ की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि संसदीय आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल विकसित किए जाने चाहिए।
AI विधायी ड्राफ्टिंग, जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाने, कार्यवाही से जुड़े प्रश्नों के त्वरित उत्तर देने और दस्तावेजों के विश्लेषण में सहायक हो सकता है। हालांकि, हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक मामलों और विशेषाधिकार से जुड़े विषयों में अंतिम निर्णय हमेशा मानव विवेक से ही लिया जाना चाहिए। यह विचार उन्होंने अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में विधायिका में AI और डिजिटलीकरण की भूमिका पर व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि देश नए युग की दहलीज पर खड़ा है, ऐसे में AI को अपने अनुकूल बनाते हुए नई दिशा देने की जरूरत है, ताकि यह विधायी प्रक्रियाओं को सशक्त बना सके। उन्होंने आगाह किया कि निगरानी के बिना इनोवेशन लोकतांत्रिक संस्थाओं को जोखिम में डाल सकता है। AI सहायक टूल की तरह काम कर सकता है, लेकिन जहां भी AI गलती करे, उसे मानव विवेक से ठीक करना होगा। वर्ष 1952 से अब तक की संसदीय कार्यवाही के डेटा का विश्लेषण AI के माध्यम से करके यह पता लगाया जा सकता है कि किसी विषय पर कब-कब किस तरह के प्रश्न पूछे गए और उनके उत्तर क्या आए हैं, जिससे भविष्य के प्रश्नों को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।
रोजगार के संदर्भ में, उन्होंने स्पष्ट किया कि AI से नौकरियां समाप्त नहीं होंगी, बल्कि नई भूमिकाएं सामने आएंगी। रोजगार जाएंगे नहीं, बल्कि बदलेंगे। इसके लिए हमें कुशल बनने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह मानव और मशीन की दौड़ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रश्न है। AI के जरिए आम आदमी की कैसे बेहतर मदद हो सकती है, इस पर हमें काम करना होगा।
