शटतिला एकादशी 2026: 23 साल बाद मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग, गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़
साल 2026 में शटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का 23 वर्षों बाद दुर्लभ संयोग बना है, जिसने श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह पैदा किया है। इस विशेष योग के चलते पटना के गंगा घाटों पर अहले सुबह से ही स्नान और दान के लिए भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने और तिल का दान करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे समस्त पापों का नाश होता है।
बांस घाट, कंगन घाट, गायघाट, दीघा और कलेक्ट्रेट घाट जैसे पटना के प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालु सुबह चार बजे से ही पहुंचने लगे थे। ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय श्रीहरि’ के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद, श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पुण्य लाभ अर्जित किया। यह दुर्लभ संयोग 23 साल बाद बनने से इसका पुण्यफल कई गुना बढ़ गया है।
मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र और अन्न का दान किया। घाटों के आसपास दान-पुण्य के लिए अस्थायी स्टॉल लगाए गए थे, जहां जरूरतमंदों को सामग्री वितरित की गई। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए, जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। गंगा घाटों पर मजिस्ट्रेट, गोताखोर और पुलिस बल तैनात थे, जबकि एनडीआरएफ की टीम भी किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रही।
गंगा स्नान के बाद, श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा-अर्चना की। लोगों का मानना है कि 23 साल बाद बने इस दुर्लभ संयोग में स्नान और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। पूरे दिन पटना के गंगा घाट आस्था और विश्वास के केंद्र बने रहे।
