उत्तर भारत में घना कोहरा: ट्रेनों की रफ्तार थमी, यात्रियों की बढ़ी मुसीबतें
उत्तर भारत में घने कोहरे का प्रकोप जारी है, जिसके चलते रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोहरे की मोटी चादर ने ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दी है, जिससे कई लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों पीछे चल रही हैं। इस देरी ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिन्हें कड़ाके की ठंड में स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
ट्रेनों की लेटलतीफी का सीधा असर डिब्बों में भीड़ के रूप में दिख रहा है। जनरल कोच में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री सफर करने को मजबूर हैं। यात्रियों की भीड़ ट्रेन के गेट से लेकर अंदर तक हर जगह नजर आ रही है। कई यात्री ट्रेन छूटने के डर से देरी से चल रही ट्रेनों में भी चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
देरी की सूचना न मिलने या अंतिम समय पर प्लेटफॉर्म बदलने से यात्री अपने भारी सामान के साथ एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर भागते नजर आए। वेटिंग रूम में भी यात्रियों की भीड़ है, और कई लोग खुले आसमान के नीचे ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए फॉग डिवाइस के बावजूद ट्रेनों की गति को नियंत्रित रखा जा रहा है।
कम दृश्यता (visibility) के कारण रेलवे ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की गति कम कर दी है। शुक्रवार को मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 7 घंटे की देरी से पहुंची। इसके अलावा, सरबत दा भला एक्सप्रेस 6 घंटे और ऊधमपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस 5 घंटे 45 मिनट लेट रही। इस स्थिति से यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
