पटना हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पत्नी-बेटियों की हत्या में 20 साल की ‘नो-परोल’ सजा
पटना हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में पत्नी और दो नाबालिग बेटियों की निर्मम हत्या के दोषी मोहम्मद ताहिर को मृत्युदंड के बजाय 20 साल की विशेष सजा सुनाई है, जिसमें किसी भी प्रकार की रिहाई या क्षमादान का लाभ नहीं मिलेगा। यह फैसला न्यायिक इतिहास में एक मिसाल कायम करता है।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और न्यायाधीश शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने कटिहार ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन दोषी मोहम्मद ताहिर की सजा में आंशिक संशोधन किया। ट्रायल कोर्ट ने ताहिर की मां हदीसा खातून को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी मोहम्मद ताहिर को 14 साल पूरे होने पर भी राज्य सरकार रिहा नहीं कर सकेगी; उसे अनिवार्य रूप से पूरे 20 साल जेल में रहना होगा। यह निर्णय समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति कड़े रुख को दर्शाता है, जिससे आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।
मामले के अनुसार, ताहिर ने अपनी पत्नी और लगभग 7 व 5 वर्ष की दो मासूम बेटियों को घर के भीतर जलाकर मार डाला था। तीनों शवों पर 90 प्रतिशत से अधिक जलने के निशान मिले थे। घटना घर के अंदर हुई, जिसे कोर्ट ने साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत अभियुक्त के विशेष ज्ञान का तथ्य माना। हालांकि, कोर्ट ने ताहिर की मां हदीसा खातून को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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