जीएसटी में इंस्पेक्टर राज खत्म: अब इंटेलिजेंस आधारित होगी माल की चेकिंग, GST compliance बढ़ेगी
जीएसटी व्यवस्था में व्यापारियों को राहत देने और ‘इंस्पेक्टर राज’ को समाप्त करने के लिए राज्य कर विभाग एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी में है। अब सचल दल इकाइयों द्वारा मौके पर वाहनों की चेकिंग की बजाय, इंटेलिजेंस-आधारित जांच पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जीएसटी चोरी के इनपुट जुटाना और उसके आधार पर कार्रवाई करना है, जिससे व्यापारियों के उत्पीड़न में कमी आएगी।
विभाग ने इस बदलाव के लिए ग्रेड-2 के सभी अपर आयुक्तों से सचल दल इकाइयों की सार्थकता और गुणवत्ता का विश्लेषण कर इंटेलिजेंस-आधारित कार्यप्रणाली पर प्रस्ताव मांगा है। यह कदम व्यापारियों की उन शिकायतों को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है, जिनमें जांच के दौरान उत्पीड़न की बात कही गई थी।
नई व्यवस्था के तहत, किसी भी वाहन को रोकने से पहले पुख्ता जानकारियां जुटाई जाएंगी। इससे न केवल व्यापारियों का उत्पीड़न रुकेगा, बल्कि विभाग की छवि भी सुधरेगी और संगठित जीएसटी चोरी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकेगा।
इस बदली हुई भूमिका के लिए एक अलग टीम गठित करने की भी योजना है, जो गोपनीय जानकारियां जुटाने और डेटा विश्लेषण का काम करेगी। यह टीम पंजीकृत व्यापारियों के कारोबार पर नजर रखेगी और टैक्स चोरी के पुख्ता सबूत मिलने पर ही कार्रवाई करेगी।
मुरादाबाद में इस नई व्यवस्था का एक पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जहां हाल ही में लोहे, लकड़ी और ईंट-भट्ठा कारोबार से जुड़ी फर्मों पर कार्रवाई की गई है। सभी प्रस्तावों के आकलन के बाद इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश में जीएसटी की 140 सचल दल इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 600 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं।
