केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करने का प्रस्ताव, जानिए इस ‘Budget Day’ का महत्व
राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ने संसद के बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी से करने और केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करने का प्रस्ताव दिया है। सूत्रों के अनुसार, 1 फरवरी रविवार होने के बावजूद सरकार इस तारीख को बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय प्रक्रियाओं में पूर्वानुमेयता और निरंतरता सुनिश्चित करना है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत फरवरी में ही एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर केंद्रित होगा।
बजट सत्र, जो कैलेंडर वर्ष का पहला संसदीय सत्र होता है, राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है। इसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है और फिर केंद्रीय बजट प्रस्तुत होता है। 2017 से केंद्रीय बजट को 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा रही है, जिसका लक्ष्य वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले बजट को लागू करना और राजकोषीय प्रशासन को सुव्यवस्थित करना है। पहले यह फरवरी के अंतिम कार्यदिवस पर प्रस्तुत किया जाता था।
बजट सत्र आमतौर पर दो चरणों में आयोजित किया जाता है, जिसमें स्थायी समितियों द्वारा मंत्रालयों की अनुदान मांगों की समीक्षा के लिए एक मध्यवर्ती विराम होता है। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की उम्मीद है, जो देश के विकास और वित्तीय नीतियों को आकार देंगे।
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