YEIDA में अहम पदों के खाली होने से विकास कार्यों पर असर, नियोजन और परियोजना विभाग में नियुक्ति का इंतजार
यमुना प्राधिकरण (YEIDA) में नियोजन और परियोजना जैसे महत्वपूर्ण विभागों में महाप्रबंधक के पद रिक्त होने से विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। इन अहम पदों पर नियुक्ति न होने के कारण उप महाप्रबंधकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। मास्टर प्लान 2041 के तहत नए सेक्टरों के नियोजन और विभिन्न विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर इसका सीधा असर दिख रहा है।
प्राधिकरण पर नए सेक्टरों के नियोजन के साथ-साथ विकास परियोजनाओं के निर्माण का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, प्राधिकरण ने शासन को महाप्रबंधक नियोजन और महाप्रबंधक परियोजना तकनीकी के पदों पर नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा है। यह नियुक्ति विकास कार्यों को गति देने के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।
यमुना प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में छह जिलों के 1149 गांव अधिसूचित हैं। प्राधिकरण फेज एक मास्टर प्लान के तहत गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर के अधिसूचित क्षेत्र में शहर विकसित कर रहा है, जिसमें लगभग एक लाख एकड़ जमीन शामिल है। फेज दो में अलीगढ़ के टप्पल और मथुरा के राया में अर्बन सेंटर की परियोजनाएं भी तैयार हैं।
हालांकि, पांच शहरी क्षेत्र विकसित करने वाले प्राधिकरण में महाप्रबंधक स्तर के कई पद रिक्त हैं। नियोजन और परियोजना जैसे प्रमुख विभागों के प्रमुखों की अनुपस्थिति में, इन विभागों की जिम्मेदारी एसीईओ शैलेंद्र भाटिया और उप महाप्रबंधक राजेंद्र भाटी जैसे अधिकारी संभाल रहे हैं। उद्योग समेत अन्य विभागों में भी महाप्रबंधक के पद रिक्त हैं, जिससे प्राधिकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। प्राधिकरण में विभिन्न श्रेणी के लगभग दो सौ पद खाली हैं।
कार्य के बढ़ते दबाव को देखते हुए, प्राधिकरण ने शासन से रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति का अनुरोध किया है। एसीईओ नगेंद्र प्रताप के अनुसार, महाप्रबंधक नियोजन के अलावा परियोजना विभाग में अलग से महाप्रबंधक तकनीकी के पद पर भी नियुक्ति का अनुरोध किया गया है, जिससे कार्यों की गति में तेजी आएगी।
