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हापुड़ में दूषित पानी से गंभीर बीमारियां, कैंसर से हर साल जा रही जान: Hapur news

By Jan 5, 2026

हापुड़ जिले में दूषित पेयजल एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। भूजल में हानिकारक रसायन और जैव तत्वों की मौजूदगी के कारण टीडीएस (TDS) का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है, जिससे लोगों के शरीर में पानी के साथ जहर घुल रहा है। इस गंभीर समस्या के चलते पेट और लीवर संबंधी बीमारियों के साथ-साथ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं। पिछले एक साल में जिले में पेट व लीवर कैंसर से 47 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग वर्तमान में इस बीमारी से जूझ रहे हैं।

काली नदी के आसपास के 40 से अधिक गांवों के साथ-साथ धौलाना, पिलखुवा, सिंभावली, बहादुरगढ़ और गढ़मुक्तेश्वर जैसे क्षेत्रों में भी भूजल दूषित पाया गया है। सादिकपुर जैसे गांवों में, जहां हर घर में सरकारी नौकरी वाले लोग हैं, वहां भी पिछले एक साल में कैंसर से कई मौतें हुई हैं। हालांकि, इन गांवों के लोग आरओ प्लांट लगवाकर शुद्ध पानी का इंतजाम कर पा रहे हैं, लेकिन जिले में दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं क्योंकि वे आरओ प्लांट या कैंपर की सुविधा नहीं ले सकते।

दूषित पानी के कारण और प्रभाव

भूजल में केमिकल और सीवर का मिलना पेयजल प्रदूषण का मुख्य कारण है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा, सीवर की गंदगी, सोडा, डीडीटी, बीएचसी और पेट्रोलियम उत्पाद सीधे भूजल में मिलकर इसे जहरीला बना रहे हैं। काली नदी, जो मेरठ से हापुड़ में प्रवेश कर बुलंदशहर तक 45 किलोमीटर का सफर तय करती है, अपने दोनों ओर एक-एक किलोमीटर की चौड़ाई तक भूजल को दूषित कर चुकी है। यहां तक कि 250 फीट की गहराई पर लगे सबमर्सिबल पंपों का पानी भी पीने योग्य नहीं है।

सरकारी उदासीनता और स्वास्थ्य संकट

बार-बार की घोषणाओं के बावजूद, जिले में पाइपलाइन पेयजल की आपूर्ति और एसटीपी (STP) का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, सिरोधन गांव में हाल ही में 400 से अधिक लोग काला पीलिया के शिकार हुए, जिनमें से 10 से ज्यादा की मौत हो गई। जलजनित बीमारियों जैसे टाइफाइड के कारण गंगा किनारे के गांवों में भी हर साल 15 से 20 लोगों की मौत होती है। एक साल में लिए गए 217 पानी के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं, जो Hapur news की गंभीरता को दर्शाता है। इस स्थिति में, जिले की आधी से अधिक आबादी दूषित पेयजल पर निर्भर है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।

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