कानपुर में महिला की मौत पर CMO से कोर्ट ने मांगा जवाब, मेडिकल नेग्लिजेंस पर सुनवाई
कानपुर में एक महिला की कथित मेडिकल नेग्लिजेंस से हुई मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) सूरज मिश्रा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को तलब किया है। कोर्ट ने सीएमओ से इस संबंध में एक रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन दस से अधिक तारीखें बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सीएमओ को 19 जनवरी 2026 तक जवाब दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है। यह घटना शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मामले का विवरण
पनकी निवासी लाल बहादुर श्रीवास्तव ने सीजेएम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी। उनकी पत्नी मंजू श्रीवास्तव को 29 अगस्त 2024 को पेट दर्द हुआ था, जिसके बाद उन्हें गोविंद नगर स्थित सिंधी हॉस्पिटल ले जाया गया। जांच में ओवरी में 70 एमएम का सिस्ट पाया गया। चार सितंबर को मंजू श्रीवास्तव का ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई।
लापरवाही के आरोप
लाल बहादुर श्रीवास्तव का आरोप है कि उनकी पत्नी की हेपेटाइटिस सी रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बावजूद ऑपरेशन किया गया, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो गई। बाद में उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। श्रीवास्तव ने डॉ. रेनू भाटिया पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट ने इस मामले में 2 मई 2025 को प्रकीर्ण वाद दर्ज किया था।
सीएमओ की निष्क्रियता पर कोर्ट की सख्ती
इसी मामले में कोर्ट ने सीएमओ को डॉक्टरों का एक विशेष पैनल गठित कर 7 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कई बार सुनवाई की तारीखें पड़ने के बावजूद सीएमओ कार्यालय से कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने अब सीएमओ को नोटिस जारी कर आगामी 19 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
