कानपुर देहात: वन चेतना केंद्र को मिला बजट, फिर भी पर्यटन स्थल बनने का इंतजार | Kanpur Dehat News
कानपुर देहात के मैथा तहसील क्षेत्र में स्थित इंदिरा गांधी वन चेतना केंद्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना अभी तक पूरी तरह से साकार नहीं हो पाई है। एक साल पहले शासन से 28 लाख रुपये का बजट मिलने के बावजूद, यह केंद्र अभी भी अपने पूर्ण विकास की बाट जोह रहा है। यह स्थिति स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए निराशाजनक है, जो इस प्राकृतिक स्थल को एक आकर्षक गंतव्य के रूप में देखना चाहते हैं।
इस केंद्र की स्थापना वर्ष 1991 में हुई थी, जब औनाहा निवासी पूर्व विधायक राजा रघुनाथ सिंह ने अपनी 40 बीघा भूमि वन विभाग को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए दान कर दी थी। 1991 से 1996 के बीच, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण और वन विभाग ने मिलकर इसे मनोरंजन पार्क के रूप में विकसित किया था। उस दौरान यहाँ झूले, कुर्सियाँ और अन्य मनोरंजन के साधन लगाए गए थे। साथ ही, पारिजात, रुद्राक्ष, इलायची, चंदन और कंदब जैसी दुर्लभ प्रजाति के पौधे भी रोपित किए गए थे।
हालांकि, बाद में बजट के अभाव और उचित देखरेख न होने के कारण वन चेतना केंद्र की हरियाली और चमक फीकी पड़ गई। मघई और इटैली झीलों के पास स्थित इस केंद्र को फिर से पर्यटन स्थल बनाने की योजना बनी। पर्यटन विभाग ने इटैली झील तक 15 लाख रुपये की लागत से सड़क का निर्माण भी कराया, लेकिन केंद्र की उपेक्षा जारी रही।
एक साल पहले मिले 28 लाख रुपये के बजट से वन विभाग ने कुछ सुधार कार्य किए हैं। सोलर पंप लगाकर सूख रहे 875 वृक्षों को नया जीवन दिया गया। वन चेतना केंद्र के गेस्ट हाउस की रंगाई-पुताई और साज-सज्जा की गई, साथ ही बच्चों के टूटे झूले भी दुरुस्त कराए गए। मॉर्निंग वॉक के लिए सड़क और कमल तालाब का सुधार भी किया गया, और सुरक्षा के लिए तारबंदी का काम भी हुआ। इन प्रयासों के बावजूद, केंद्र को एक पूर्ण विकसित पर्यटन स्थल के रूप में बदलने का इंतजार अभी भी जारी है, जिससे इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
