कानपुर में 2.5 करोड़ का साइबर फ्रॉड: कंबोडिया से जुड़े 7 आरोपी गिरफ्तार, ऐसे फंसाते थे
कानपुर में एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जहां एक कारोबारी से 2.5 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार सीधे कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों से जुड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की गई पूरी रकम को 96 अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से डॉलर में बदलकर कंबोडिया भेजा गया था। यह मामला भारतीय शहरों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उजागर करता है।
कैसे फंसाया गया कारोबारी को?
चकेरी निवासी राहुल केसरवानी, जो ज्वैलरी बॉक्स बनाने का कारोबार करते हैं, ठगी का शिकार हुए। मई 2025 में उन्हें फेसबुक पर एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद युवती ने व्हाट्सएप पर ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट के नाम पर राहुल को एक वेबसाइट से जोड़ा। शुरुआत में मुनाफे का लालच देकर उनसे 10 लाख रुपये का निवेश कराया गया। जब यह राशि बढ़कर 26 लाख रुपये दिखने लगी, तो युवती ने 50 लाख रुपये और निवेश करने को कहा।
राहुल के पास इतनी बड़ी रकम न होने पर युवती ने दोस्ती का हवाला देकर खुद ही 50 लाख रुपये निवेश करने की बात कही। इसी बीच, एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को युवती का पिता और कर्नल बताया। उसने राहुल को धमकी दी कि वह उसकी बेटी के साथ फ्लर्ट कर रहा है। कर्नल ने खुद को कानपुर के पुलिस आयुक्त का दोस्त बताते हुए अपने ऑफिस का सेटअप भी दिखाया। इस तरह दबाव बनाकर और झांसा देकर राहुल से 14 जून 2025 से 9 दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न माध्यमों से कुल 2.5 करोड़ रुपये जमा कराए गए।
कंबोडिया से संचालित होता था नेटवर्क
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों में ओसामा मुख्य आरोपी है। ओसामा कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के लिए स्थानीय हैंडलर के रूप में काम करता था। उसका काम ठगी गई रकम को भारतीय बैंक खातों से निकालना, उसे डॉलर में बदलना और फिर हवाला के जरिए कंबोडिया भेजना था। पुलिस ने ओसामा के पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए 12 बैंक खातों की जानकारी भी बरामद की है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह के साइबर अपराधों को कंबोडिया, थाईलैंड, चीन, म्यांमार और नेपाल जैसे देशों से संचालित किया जा रहा है। ये विदेशी ठग भारत में स्थानीय हैंडलर्स का उपयोग करके ठगी को अंजाम देते हैं। इससे पहले भी कानपुर में दो डॉक्टरों और एक लैब टेक्नीशियन से 5.70 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी, जिसमें क्राइम ब्रांच ने केवल हैंडलर्स को ही पकड़ा था, जबकि विदेशी आका पकड़ से बाहर रहे।
