कानपुर में ‘नवां साल गुरु दे नाल’ कीर्तन दरबार, संगत हुई निहाल
कानपुर में नव वर्ष के आगमन को समर्पित महान कीर्तन दरबार ‘नवां साल गुरु दे नाल’ का भव्य आयोजन किया गया। मोतीझील में बने विशेष पंडाल में श्री गुरु सिंह सभा कानपुर और समूह सिख संगत के सहयोग से यह कार्यक्रम हुआ। इस आयोजन में सिख धर्म के अनुयायियों ने श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी के पावन सानिध्य में नए साल का स्वागत गुरुवाणी कथा और कीर्तन के माध्यम से किया।
आयोजन की मुख्य विशेषता यह रही कि भीषण सर्दी की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी के लोग लंबी कतारों में जुगो जुग अटल श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी के समक्ष माथा टेकने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। संगत वाहेगुरु वाहेगुरु के जाप के साथ नए साल की शुरुआत कर रही थी।
गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब चौक के हजूरी रागी भाई हरविंदर सिंह, भाई भूपिंदर सिंह गुरदासपुरी, भाई कुलदीप सिंह राजा ने गुरुवाणी की अमृत वर्षा की। उन्होंने भावपूर्ण स्वरों में शबद ‘गनिव तेरी सिफत सच्चे पातशाह’ और ‘सुनी अरदास स्वामी मेरे’ से संगत को निहाल किया। सिख फुलवारी के बच्चों ने भी कीर्तन गायन किया और गुरमत प्रश्नोत्तरी के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ नांदेड़ के हजूरी रागी भाई सुरजीत सिंह जी खालसा ने ‘जगमग नूर है, साध संगत अस्थान जगमग नूर है’ और ‘सो क्यू बिसरै जिनी सब किछु दीआ’ जैसे शबदों से संगत को गुरु यश से जोड़ा। अरदास में बीते साल के लिए गुरु का शुक्राना किया गया और नए साल में सभी के सुख शांति और सरबत के भले की कामना की गई।
