कारोबारी सुगमता: ‘जन विश्वास सिद्धांत’ से Ease of Doing Business में बड़ा बदलाव
आर्थिक विकास के लिए कारोबारी सुगमता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह निर्धारित करता है कि किसी व्यक्ति के लिए व्यवसाय शुरू करना, चलाना और उसका विस्तार करना कितना आसान है। जब नियम सरल होते हैं और निर्णय पूर्वानुमानित होते हैं, तो कंपनियां उत्पादन, भर्ती और निवेश पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। इसके विपरीत, जब प्रक्रियाएं धीमी या अनिश्चित होती हैं, तो उद्यमों को अनुपालन, मुकदमेबाजी के बोझ और जोखिमों से बचने में ही अपनी ऊर्जा लगानी पड़ती है। भारत जैसे देश में, नियामकीय जटिलताएं और कई अनुमतियों की आवश्यकता उद्यमों के लिए एक छिपे हुए टैक्स की तरह काम करती हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों का दायरा सिकुड़ता है और परियोजनाओं में देरी के कारण लागत बढ़ जाती है।
वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने इन परेशानियों को समझते हुए कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने के लिए सार्थक प्रयास शुरू किए। सरकार ने व्यवसाय शुरू करने, चलाने और समापन को आसान बनाने के लिए एक समग्र नीति अपनाई है। इस क्रम में, कानूनों को सरल बनाया गया है, प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण हुआ है और कई गतिविधियों को आपराधिक दायरे से मुक्त किया गया है। केवल आवश्यक अनुमतियों के लिए ही प्रतीक्षा करनी पड़ती है और उन्हें प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान बनाई गई है। गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े नियम भी तार्किक हुए हैं, ताकि लागत पर अनावश्यक बोझ न बढ़े। हाल ही में चार नई श्रम संहिताओं ने सुधारों के इस सिलसिले को नया आयाम दिया है, जिसमें श्रमिकों से लेकर उद्यमियों के हितों को पूरा ध्यान रखा गया है।
सरकार अब एक ‘जन विश्वास सिद्धांत’ पर काम कर रही है, जो नियामकीय दृष्टिकोण में गहन बदलाव पर केंद्रित है। इसका मूल विचार यह है कि विश्वास ही सामान्य दस्तूर होना चाहिए और नियंत्रण अपवाद। इस सिद्धांत के तहत, राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को छोड़कर अन्य तमाम आर्थिक गतिविधियों के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। लाइसेंस स्थायी आत्म-पंजीकरण में बदल जाएंगे, निरीक्षण जोखिम-आधारित और अमूमन तृतीय पक्ष द्वारा होंगे, और आपराधिक दंड की जगह आनुपातिक सामान्य जुर्माना लगाया जाएगा। यह भारत के नियामकीय दृष्टिकोण में एक बड़े परिवर्तन का संकेत है, जो लाइसेंस राज के उलट है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार सुधारों की व्यापक दिशा तो निर्धारित कर सकती है, लेकिन किसी भी सुधार की दशा मुख्य रूप से राज्यों, जिला और स्थानीय निकायों द्वारा निर्धारित होती है। इसलिए राज्यों को अपने स्तर पर भी प्रयास करने होंगे। उन्हें अनुमतियों के दायरे को घटाने से लेकर नियमों का मानकीकरण भी करना होगा। जिला व्यापार सुधार कार्ययोजना (डी-बीआरएपी), 2025 जैसी पहल के माध्यम से डिजिटलीकरण, समयबद्ध मंजूरियां और निवेशक सुविधा को जिला स्तरीय शासन में समाहित किया जा रहा है, ताकि कारोबारी सुगमता केवल नीतिगत आख्यान तक ही सीमित न रहे, बल्कि दैनिक कामकाज में भी महसूस की जा सके।
यूपी सफाई कर्मचारी संघ चुनाव: सुरेंद्र सिंह जिलाध्यक्ष, सुखबीर सिंह महामंत्री निर्विरोध चुने गए
सोरों में दर्दनाक हादसा: बाइक फिसलने से किशोर की मौत, दो घायल (Kasganj news)
UP voter list: कासगंज की तीन विधानसभा सीटों से 1.72 लाख मतदाताओं के नाम हटेंगे
नोएडा-गाजियाबाद में शीतलहर का प्रकोप, 1 जनवरी तक सभी School closed; जानें पूरा आदेश
Chhapra news: अंगीठी हादसे में जान गंवाने वाले तीन मासूमों का अंतिम संस्कार, शहर में पसरा सन्नाटा
Smart Girl Workshop का समापन, बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
Smart Girl Workshop: बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास
आगरा में भागवत कथा: कीर्ति किशोरी ने सुनाया ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र, भावुक हुए भक्त (Agra news)
