कोरोना के बाद Air Pollution India का सबसे बड़ा संकट, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी
ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय मूल के श्वसन रोग विशेषज्ञों ने भारत में वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद देश जिस सबसे बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है, वह वायु प्रदूषण है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात साल दर साल बिगड़ते जाएंगे और सांस संबंधी बीमारियों का संकट विकराल रूप ले लेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में सांस संबंधी बीमारियों का संकट धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन अभी तक इसका ठीक से पता नहीं चल पाया है और न ही इसके समाधान के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। ब्रिटेन में प्रैक्टिस करने वाले कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने कहा कि भारत में सांस की बीमारियों के बड़े संकट की आशंका है। इन बीमारियों की लहर भारतीय नागरिकों और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है।
लिवरपूल के कंसल्टेंट श्वसन रोग विशेषज्ञ मनीष गौतम ने कहा कि यह कड़वी सच्चाई है कि उत्तर भारत में रहने वाले लाखों लोगों को नुकसान पहले ही हो चुका है। उन्होंने कहा कि हाल में जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे बहुत कम हैं। उन्होंने नीति निर्धारकों से अपील की कि वे सांस संबंधी बीमारियों का समय रहते पता लगाने और उनका इलाज करने पर ध्यान दें।
डॉक्टरों के अनुसार, दिसंबर में सिर्फ दिल्ली के अस्पतालों में सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि देखी गई। इसमें बड़ी संख्या उन मरीजों की है जो पहली बार सांस की समस्याओं का शिकार हुए हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और रोकथाम के उपाय महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन अब केवल इन्हीं उपायों से काम नहीं चलेगा। भारत ने पहले भी यह उदाहरण पेश किया है कि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम चलाना संभव है।
सरकार के उपायों ने शीघ्र निदान और सुनियोजित उपचार कार्यक्रमों के माध्यम से टीबी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया है। अब श्वसन रोगों के लिए भी इसी तरह की तत्परता और बड़े पैमाने पर कदम उठाने की आवश्यकता है। लंदन के सेंट जार्ज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के मानद हृदय रोग विशेषज्ञ राजय नारायण के अनुसार यदि इस संकट को समय रहते हल नहीं किया गया, तो यह स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ दोनों को और बढ़ा देगा। उन्होंने कहा कि कई वैज्ञानिक साक्ष्य हैं जो बताते हैं कि वायु प्रदूषण कई गंभीर बीमारियों का कारण है।
