Christmas 2025: Santa Claus के लाल-सफेद कपड़ों का रहस्य, Coca-Cola से पहले क्या था इतिहास?
क्रिसमस का नाम सुनते ही सांता क्लॉज की छवि दिमाग में आती है, जो लाल और सफेद कपड़ों में बच्चों के लिए उपहार लेकर आते हैं। यह लाल-सफेद लिबास अब क्रिसमस की पहचान बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सांता के लिए इन्हीं रंगों को क्यों चुना गया? इस सवाल का जवाब इतिहास और संस्कृति से जुड़ा है।
सांता क्लॉज, जिन्हें सेंट निकोलस के नाम से भी जाना जाता है, पहले हमेशा लाल रंग के कपड़े नहीं पहनते थे। यूरोपीय चित्रणों में, सेंट निकोलस को अक्सर हरे, नीले या भूरे रंग के बिशप के कपड़ों में दिखाया जाता था। 19वीं शताब्दी तक, सांता के कपड़ों का रंग अलग-अलग संस्कृतियों में अलग-अलग था।
सांता के लाल-सफेद कपड़ों को लेकर एक मशहूर धारणा है कि यह रंग कोका-कोला कंपनी की 1930 के दशक के ऐड कैंपेन की देन है। हालांकि, यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। कोका-कोला के कलाकार हैडन सन्डब्लॉम ने सांता के आधुनिक रूप को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन लाल रंग पहले से ही सांता से जुड़ा हुआ था। कोका-कोला ने इस छवि को और मजबूत किया तथा दुनिया भर में फैलाया।
लाल और सफेद रंगों का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है। ये रंग क्रिसमस के पारंपरिक रंगों लाल और हरे से भी मेल खाते हैं। 20वीं शताब्दी में, मीडिया और ग्लोबलाइजेशन के जरिए सांता की इस छवि ने दुनिया भर में स्वीकार किया गया। इससे दुनियाभर में सांता क्लॉज की एक जैसी छवि बन गई।
