भारतीय सेना की शान ‘बिहार रेजिमेंट’, द्वितीय विश्व युद्ध से गलवान तक का शौर्य इतिहास
भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट केवल एक सैन्य इकाई नहीं है, बल्कि शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल है। इस रेजिमेंट की जड़ें ब्रिटिश इंडियन आर्मी से जुड़ी हुई हैं और इसने गुलामी के काल से लेकर स्वतंत्र भारत तक कई महत्वपूर्ण युद्धों में अपना जौहर दिखाया है।
बिहार रेजिमेंट का औपचारिक गठन 1941 में ब्रिटिश भारतीय सेना के हिस्से के रूप में हुआ था। शुरुआती दौर में इसे 11वीं (प्रादेशिक) बटालियन, 19वीं हैदराबाद रेजिमेंट के नाम से जाना जाता था। 1 नवंबर, 1945 को आगरा में लेफ्टिनेंट कर्नल आर.सी. म्यूलर द्वारा इसका औपचारिक गठन किया गया और इसका सेंटर दानापुर में स्थापित किया गया। दानापुर छावनी भारत की दूसरी सबसे पुरानी छावनी मानी जाती है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, बिहार रेजिमेंट की पहली बटालियन ने लेफ्टिनेंट कर्नल जे. आर. एच. ट्वीड के नेतृत्व में अपनी पहचान स्थापित की। इसके बाद, 1971 के भारत-पाक युद्ध में रेजिमेंट की 10वीं बटालियन ने पूर्वी पाकिस्तान में अखौरा पर कब्जा करने का बेहद कठिन मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया। यह जीत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हुई और ढाका की ओर भारतीय सेना की बढ़त का मार्ग प्रशस्त किया।
1999 के कारगिल युद्ध में भी बिहार रेजिमेंट ने अहम भूमिका निभाई। दुश्मन बाटालिक सेक्टर की ऊंची पहाड़ियों पर काबिज था। रेजिमेंट ने जुबर हिल और प्वाइंट 4268 जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को वापस अपने नियंत्रण में लिया। इस दौरान मेजर मरियप्पन सरवनन ने अग्रिम मोर्चे पर नेतृत्व करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
15 जून 2020 को गलवान घाटी में बिहार रेजिमेंट ने एक बार फिर इतिहास रचा। कर्नल बी. संतोष बाबू के नेतृत्व में रेजिमेंट ने चीनी सैनिकों का डटकर सामना किया। भीषण हाथापाई में कर्नल बाबू सहित रेजिमेंट के 12 जवान शहीद हुए, जबकि कुल 20 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। रेजिमेंट ने दुश्मन को भारतीय सीमा में एक इंच भी आगे बढ़ने नहीं दिया।
बिहार रेजिमेंट मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और ओडिशा क्षेत्र की वीर परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। रेजिमेंट का युद्ध घोष ‘बजरंग बली की जय’ और ‘बिरसा मुंडा की जय’ है। इसका ध्वज वाक्य ‘करम ही धर्म’ है। रेजिमेंट का प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ के तीन सिंह हैं, जो शक्ति, साहस और आत्मविश्वास के प्रतीक माने जाते हैं।
