नॉकआउट मैचों में क्यों फेल हो जाते हैं Suryakumar Yadav? कप्तानी के बाद प्रदर्शन में गिरावट की वजह क्या?
भारतीय क्रिकेट टीम के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव इस समय एक विरोधाभास का सामना कर रहे हैं। उन्हें टी20 फॉर्मेट में दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में से एक माना जाता है, लेकिन बड़े नॉकआउट मैचों में उनका प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहा है। क्रिकेट जगत में उन्हें ‘ग्रुप स्टेज बुली’ का टैग दिया गया है, जिसका मतलब है कि वह लीग मैचों में तो शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन जब सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो वह दबाव में बिखर जाते हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो सूर्यकुमार यादव का करियर दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखता है। एक तरफ, उनके नाम लगभग 2,800 टी20I रन हैं, जो लगभग 170 के स्ट्राइक रेट से बने हैं। दूसरी तरफ, आईसीसी नॉकआउट मैचों में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। 2022 विश्व कप सेमीफाइनल में 10 गेंदों पर 14 रन और 2024 फाइनल में 4 गेंदों पर 3 रन उनके नॉकआउट संघर्षों को दर्शाते हैं।
हाल ही में कप्तानी संभालने के बाद उनके प्रदर्शन में और गिरावट आई है। 2025 एशिया कप में भारत ने खिताब जीता, लेकिन सूर्यकुमार यादव का बल्ला शांत रहा। छह पारियों में उनके कई कम स्कोर थे, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ डक भी शामिल था। जो खिलाड़ी अपने 360-डिग्री शॉट्स के लिए जाना जाता था, वह दबाव में आकर रक्षात्मक और अस्थिर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि कप्तानी ने उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन को प्रभावित किया है। जहां एमएस धोनी जैसे खिलाड़ियों के लिए कप्तानी ने फोकस बढ़ाया, वहीं सूर्यकुमार यादव के लिए यह एक बोझ साबित हुई। 2024 से पहले उनका औसत 46+ था, जो कप्तानी संभालने के बाद गिर गया। टीम संतुलन के लिए बल्लेबाजी क्रम में बार-बार बदलाव ने भी उनकी लय को बिगाड़ा। नॉकआउट मैचों में विरोधी गेंदबाजों ने उनकी कमजोरियों का फायदा उठाया, जिससे भारत के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज की फॉर्म टीम के लिए चिंता का विषय बन गई।
