US H-1B visa फीस बढ़ोतरी: KTR बोले- भारत के टैलेंट को रीशेप करेगा ये फैसला, जानें क्यों?
अमेरिका द्वारा H-1B वीजा शुल्क में अचानक की गई वृद्धि ने भारत के तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में चिंता पैदा कर दी है। यह फैसला उन हजारों भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में करियर बनाने का सपना देखते हैं। तेलंगाना के पूर्व मंत्री और हैदराबाद के आईटी इकोसिस्टम के प्रमुख वास्तुकार के.टी. रामा राव (KTR) ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की है। उनका मानना है कि यह सिर्फ एक वित्तीय बोझ नहीं है, बल्कि यह भारत के प्रतिभा परिदृश्य को फिर से परिभाषित करने वाला क्षण है।
KTR ने कहा कि तेलंगाना के लिए H-1B वीजा का महत्व केवल संख्या से कहीं अधिक है। यह हमारे युवाओं की महत्वाकांक्षा और प्रतिस्पर्धी भावना को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भारत के दक्षिणी राज्यों जैसे तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में, विदेशों में करियर बनाना शिक्षा से रोजगार तक की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग रहा है। दशकों से, भारतीय इंजीनियरों और पेशेवरों ने अमेरिकी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
KTR ने इस वृद्धि को मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के लिए H-1B अवसर सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक पीढ़ीगत निवेश होता है। हालांकि, KTR ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि यह भारत की वैश्विक प्रतिभा अर्थव्यवस्था में स्थिति का सवाल है। उनका मानना है कि उच्च वीजा लागत अल्पकालिक रूप से आवेदकों को धीमा कर सकती है, लेकिन भारतीय कुशल कार्यबल की मांग कम नहीं होगी।
KTR ने इस स्थिति को भारत के लिए एक अवसर के रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि यह हमें याद दिलाता है कि वैश्विक अवसर हमेशा विकसित होते रहेंगे, लेकिन प्रतिभा, लचीलापन और तैयारी हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। उनका तर्क है कि भारत को अब घरेलू स्तर पर पर्याप्त अवसर पैदा करने की जरूरत है ताकि महत्वाकांक्षी युवाओं को देश में ही रोका जा सके और बाहरी गतिशीलता पर निर्भरता कम हो सके।
