भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव: SHANTI Bill पास, अब निजी कंपनियां भी करेंगी परमाणु ऊर्जा उत्पादन
भारत की ऊर्जा नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए संसद ने SHANTI Bill 2025 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के पारित होने से अब निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन के दरवाजे खुल गए हैं। यह कदम भारत के 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है।
वर्तमान में भारत अपनी कुल बिजली जरूरतों का केवल 3.1 प्रतिशत ही परमाणु ऊर्जा से पूरा करता है। देश की बढ़ती आबादी और 8-9 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए विश्वसनीय और प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है। परमाणु ऊर्जा 24×7 बिजली आपूर्ति का एक स्थिर स्रोत है और भारत के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दशकों से भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पर पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण रहा है। निजी कंपनियों और विदेशी निवेश को अनुमति नहीं मिलने के कारण यह क्षेत्र अपनी पूरी क्षमता से विकसित नहीं हो पाया। SHANTI Bill इसी बाधा को दूर करता है, जिससे पर्याप्त पूंजी और नई तकनीक का प्रवाह संभव हो सकेगा।
परमाणु ऊर्जा वह शक्ति है जो परमाणु के केंद्र (न्यूक्लियस) से निकलती है। बिजली उत्पादन के लिए न्यूक्लियर फिशन (विखंडन) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, जिसमें यूरेनियम जैसे भारी परमाणु टूटते हैं और बड़ी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। यह ऊष्मा पानी को भाप में बदलकर टर्बाइन घुमाती है और बिजली पैदा करती है। यह प्रक्रिया कोयला आधारित संयंत्रों के समान है, लेकिन इसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है।
