UP: 20 रुपये की पहचान से तय होगी निपुणता, शिक्षा को जीवन से जोड़ने की पहल
उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों के बच्चों की शिक्षा को अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। निपुण भारत मिशन के तहत, बच्चों की गणित और भाषा की समझ को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने की एक नई पहल शुरू की गई है। इस नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कक्षा एक का कोई बच्चा 20 रुपये तक के नोट और सिक्के पहचान लेता है, तो उसे गणित में ‘निपुण’ माना जाएगा।
इस मिशन के तहत, बाल वाटिका से लेकर कक्षा दो तक के बच्चों की बुनियादी भाषाई और गणितीय दक्षताओं का आकलन किया जा रहा है। कक्षा एक के लिए 20 रुपये तक के नोट व सिक्कों की पहचान और सरल लेनदेन की क्षमता को निपुणता का मानक बनाया गया है। इसी तरह, कक्षा दो के छात्रों के लिए यह मानक 100 रुपये तक के नोट व सिक्कों की पहचान और लेनदेन की क्षमता है। शिक्षकों का मानना है कि यह कदम बच्चों को गिनती, जोड़-घटाव और भाषा को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझने में मदद करेगा।
पिछले साल किए गए एक आकलन के विश्लेषण से पता चला है कि प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत छात्र औसत स्तर पर निपुण हैं, जबकि 33 प्रतिशत से कम निपुण छात्रों वाले विद्यालयों की संख्या भी काफी रही। हालांकि, अब तक 48 हजार से अधिक विद्यालयों को ‘निपुण’ घोषित किया जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के अनुरूप, शिक्षा मंत्रालय ने निपुण लक्ष्यों को संशोधित किया है, जिसमें बच्चों के पठन, समझ और लेखन पर विशेष जोर दिया गया है।
संशोधित लक्ष्यों के अनुसार, बाल वाटिका में बच्चों को दो-तीन अक्षरों वाले शब्द पढ़ने, अपना नाम पहचानने और लिखने तथा नौ तक की संख्याएं जानने की अपेक्षा है। कक्षा एक में, बच्चों से छोटे वाक्य पढ़ने-लिखने, 20 तक गिनती, जोड़-घटाव करने और 20 रुपये तक की पहचान करने की उम्मीद की जाती है। कक्षा दो के छात्रों को छह से आठ वाक्यों का पाठ पढ़कर समझने, चार-पांच वाक्य लिखने और 99 तक जोड़-घटाव के साथ 100 रुपये तक का लेनदेन करने में सक्षम होना चाहिए। यह मिशन रटने की बजाय समझकर सीखने और एक मजबूत शैक्षिक नींव तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
