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सुलतानपुर में ठंड का कहर: सांस के मरीजों की बढ़ी मुसीबत, अस्पताल में लगी लंबी कतार

By Dec 16, 2025

सुलतानपुर में सर्दी बढ़ने के कारण फेफड़े के रोगियों की समस्याएं बढ़ गई हैं। जकड़न तथा सांस लेने में तकलीफ के कारण 90 से अधिक मरीज मेडिकल कॉलेज के अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से कई मरीजों को भर्ती भी करना पड़ रहा है। चिकित्सक ऐसे मरीजों को जाड़े भर विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी भी दे रहे हैं।

वरिष्ठ फिजीशियन एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. आर धीरेंद्र कहते हैं कि मौसम में बदलाव का असर पुराने मरीजों में खास तौर पर देखा जा रहा है। डॉ. यादव के अनुसार फेफड़े शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं। खान-पान, देखरेख व जीवन शैली में अनियमितता से इनके प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। टीबी व दमा जैसे रोग हो जाते हैं। कमजोर होने से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने लगती है। सांस लेने में घुटन व खांसी से रोगी का जीवन कष्टकर हो जाता है।

मंगलवार को उनकी ओपीडी में कई पीड़ित पहुंचे। कुड़वार के रामधन पुराने सांस रोगी हैं। उनका एक फेफड़ा पहले से कमजोर है। जाड़े में हर साल उनकी समस्या बढ़ जाती है। इसी प्रकार लाल डिग्गी की अंतिमा को भी सांस लेने में दिक्कत थी। अमहट के रामतेज जोर-जोर से खांस रहे थे। ओपीडी में बैठे चिकित्सक डॉ. शाश्वत मिश्र उन्हें मुंह पर रुमाल रखकर खांसने की सलाह दी। दिखौली के राज कुमार जब बोल रहे थे, तो उनकी आवाज से सांय-सांय की ध्वनि निकल रही थी। मो. सत्तार कई साल से दमा रोगी हैं। जरा सी भी हवा चलने पर उनकी समस्या बढ़ जाती है।

डॉ. धीरेंद्र कहते हैं कि फेफड़े खराब होने के पीछे सबसे बड़ा कारण धूमपान, टीबी या कैंसर प्रमुख हैं। इनसे फेफड़े कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। फेफड़े खराब होकर सिकुड़ जाते हैं और रक्त में आक्सीजन का प्रवाह बाधित होने लगता है। कभी-कभी खांसते समय रक्त भी निकलता है। ऐसे रोगियों को तत्काल चिकित्सीय सलाह की जरूरत होती है। कुछ मरीजों को भर्ती कर उन्हें आक्सीजन देनी पड़ती है। कुछ दवाएं देकर इनहेलर लेने की सलाह भी दी जाती है।

मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में इलाज व दवाओं की निश्शुल्क सुविधा उपलब्ध है। चिकित्सक के अनुसार फेफड़े को मजबूत बनाने के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। इसके लिए स्पाइरोमीटर प्रयोग करना चाहिए। इसमें तीन गेंदें होती हैं। नियमित अभ्यास से इन तीनों गेंदों को आसानी से ऊपर उठाया जा सकता है।

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