नोएडा प्राधिकरण का उद्यमियों को तोहफा, अदेयता प्रमाण-पत्र की बाध्यता खत्म
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम ने उद्यमियों को बड़ी राहत दी है। आवंटित भूखंड का वन टाइम लीज रेंट जमा कर अदेयता प्रमाण पत्र प्राधिकरण से प्राप्त करने वाले उद्यमियों को अब प्राधिकरण में अपनी इकाई के लिए किराये या बंधक अनुमति लेने के लिए अदेयता प्रमाण पत्र नहीं देना होगा। यह फैसला उद्यमियों के लिए एक बड़ी राहत है, जो लंबे समय से इस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग कर रहे थे।
अभी तक, जब कोई उद्यमी अपनी इकाई के लिए किराया या बंधक अनुमति लेने के लिए प्राधिकरण में आवेदन करता था, तो लेखा विभाग उससे अदेयता प्रमाण-पत्र की मांग करता था। इससे उद्यमी के साथ-साथ प्राधिकरण के कर्मचारी/अधिकारी का अनावश्यक समय व्यर्थ होता था। यह प्रक्रिया कारोबारियों के लिए एक बड़ी बाधा बन गई थी।
इस मुद्दे को लेकर नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) लगातार प्राधिकरण कार्यालय पर आपत्ति जता रहा था। एनईए अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा था कि यदि उद्यमी ने वन टाइम लीज रेंट जमा कराने के उपरांत अदेयता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया है, तो उससे दोबारा प्रमाण-पत्र की मांग न की जाए। उनका तर्क था कि इससे कारोबारी काम में असर पड़ता है और प्राधिकरण को स्वयं ही इकाइयों से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए।
पिछले दिनों उद्योग सहायक समिति में इस मुद्दे को मजबूती के साथ उठाया गया, जिस पर विस्तार से चर्चा हुई। इस पर प्राधिकरण मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. लोकेश एम ने उद्यमियों को राहत देते हुए कहा कि यदि उद्यमी द्वारा वन टाइम लीज रेंट जमा कराने के उपरांत अदेयता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया है, तो उससे दोबारा प्रमाण-पत्र की मांग नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उद्यमियों की इकाइयों से संबंधित कामकाज को पारदर्शी व सरल किया जाए, जिससे निवेश की संभावना प्रबल होंगी।
