बिहार में बढ़ रहा खतरनाक क्रॉनिक क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस का खतरा, IGIMS ने की 148 सफल सर्जरी; धूम्रपान-शराब मुख्य कारण
पटना समेत पूरे बिहार में क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतें हैं। आईजीआईएमएस के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. मनीष मंडल ने सिंगापुर में आयोजित इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन्स के 44वें द्विवार्षिक विश्व सम्मेलन में यह शोध पत्र प्रस्तुत किया।
डॉ. मंडल ने बताया कि आईजीआईएमएस में पिछले पांच वर्षों में 148 जटिल क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस मामलों की सफल सर्जरी की गई है, जो राज्य में इस बीमारी के बढ़ते भार को रेखांकित करती है। शोध पत्र में बिहार में बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए जनजागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर उपचार की विशेष आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
शोध पत्र के अनुसार, बीमारी बढ़ने के प्रमुख कारण भोजन की गुणवत्ता में गिरावट, पश्चिमी फूड हैबिट की नकल, शराब व धूम्रपान का बढ़ता उपयोग और तनावपूर्ण जीवनशैली शामिल है। इलाज की पहली सीढ़ी एंडोस्कोपिक तकनीक है, जिसमें पैनक्रियाटिक डक्ट की रुकावट दूर की जाती है। यदि एंडोस्कोपी और दवा से लाभ न मिले तो सर्जरी आवश्यक हो जाती है।
पारंपरिक लेटरल पैनक्रिएट पैनक्रिएटिको-जेजुनोस्टामी (एलपीजे) के साथ अब लैपरोस्कोपिक और रोबोटिक एलपीजे तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन तकनीकों में रक्तस्राव कम होता है, सर्जरी में समय कम लगता है और मरीज जल्दी काम पर लौट पाता है। समय पर सर्जरी से पैनक्रियास की कार्यक्षमता बेहतर होती है और कई मरीजों में डायबिटीज की दवाओं की जरूरत भी कम पड़ सकती है। जटिल स्थितियों में, जहां कैंसर का खतरा रहता है, टोटल पैनक्रिएटेक्टामी और आइसलेट सेल ट्रांसप्लांट किया जाता है।
