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97 लाख के कोडीन सीरप का बड़ा घोटाला, बिल पर खरीदकर नशे के लिए बेच दिया!

By Dec 10, 2025

कोडीनयुक्त खांसी के सीरप समेत अन्य नारकोटिक दवाओं की बिलों पर जमकर खरीद की गई, लेकिन उसका स्टाक और बिक्री के दस्तावेज नहीं मिले। कारोबारियों ने दवाएं मंगाई और उन्हें लाखों की हेरफेर कर ठिकाने लगा दिया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में सब खुल गया। चूंकि कोडीनयुक्त सीरप और अन्य नारकोटिक दवाओं का बड़े पैमाने पर अवैध रूप से इस्तेमाल नशा के लिए भी किया जाता है, ऐसे में इसके बिक्री में जमकर खेल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

इसी मामले में फंसी एक्सट्रीम हेल्थ साल्यूशन नाम की फर्म ने जिस तरह से गाजियाबाद की एक कंपनी से सालभर में 97 लाख रुपये के कोडीनयुक्त सीरप की खरीद की लेकिन उसके पास इसका कोई स्टाक न मिलना और बिक्री के भी बिल न दिखा पाना, यह साफ कर रहा है कि फर्म ने बिल-बाउचर्स पर खरीद दिखाई और दवाओं को ठिकाने लगवा दिया। कोडीनयुक्त और नारकोटिक दवाओं के कारोबार में हेराफेरी का खेल कोई नया नहीं है। पहले भी इसे मामलों में कई दवा कारोबारी फंस चुके हैं और उनसे कड़ी पूछताछ भी की जा चुकी है।

दरअसल, इन दवाओं का प्रयोग अवैध रूप से नशे के लिए भी होता है, इसलिए इसकी देश के तमाम हिस्सों के साथ बांग्लादेश तक इसकी काफी मांग रहती है। चूंकि इन दवाओं की खुलेआम बिक्री पर प्रतिबंध है, इसलिए जो भी फर्म इन दवाओं की बिक्री करेगी, उन्हें क्रय-विक्रय के सभी बाउचर्स भी दिखाने पड़ेंगे। इसलिए इन दवाओं की अवैध बिक्री में शामिल कई दवा कारोबारी चोरी-छिपे इसकी खेप मंगवाते हैं। इतना ही नहीं, सारा लेनदेन बिल-बाउचर्स पर होता रहता है और दवाएं इन्हीं के जरिये ठिकानों पर लगाई जाती रहती हैं।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 20 और 21 नवंबर को इसी शक में तीन फर्मों की जांच शुरू कराई थी। इसमें फंसी गली नवाबान स्थित एक्सट्रीम हेल्थ साल्यूशन नाम की फर्म को लेकर जांच में ऐसी ही गड़बड़ी का खेल सामने आ चुका है। उसने गाजियाबाद की एक फर्म से करीब 97 लाख रुपये कीमत की 62,687 कोडीनयुक्त सीरप की बोतलों की खरीद की, सारा लेनदेन कागजों पर ही चला। जांच के दौरान मौके पर न तो कोई स्टाक मिला और न ही फर्म मालिक राहुल सभरवाल बिक्री के बिल-बाउचर्स दिखा सके।

इतना जरूर है कि इन सीरप की खरीद के लिए पीलीभीत के बरखेड़ा की एक सूर्या मेडिकल स्टोर ने उन्हें 13 लाख रुपये का आनलाइन भुगतान है, लेकिन बाकी लाखों रुपये की खरीद का ब्योरा कहां है, इसका कोई पता नहीं चल सका है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पकड़ी गई गड़बड़ी में खरीद का ब्योरा केवल एक साल का ही है, जबकि कारोबारी काफी समय से दवाओं की बिक्री कर रहा है।

नारकोर्टिस और कोडीन युक्त दवाओं की बिक्री की चेन बांग्लादेश तक जुड़ी है। प्रदेश में कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें इन दवाओं की खेप बांग्लादेश जाती हुई पकड़ी जा चुकी है। बताते हैं कि मंडल व आसपास के कई जगहों के दवा कारोबारियों के इसमें शामिल होने का शक काफी दिनों से है। यह दवाएं लखनऊ होते हुए कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश पहुंचाई जाती है। चूंकि यह सारा खेल ट्रांसपोर्टरों से मिलकर होता है और उन्हें के जरिये इसकी खेप को चोरी-छिपे इधर-उधर भेज दी जाती है, इसलिए जांच टीम कई ट्रांसपोर्टरों के यहां भी पहुंचकर सुराग लगाने में जुटी है, ताकि इस खेल का राजफाश किया जा सके।

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