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बंद फाइलों से निकली एग्री क्लीनिक योजना, किसानों को मिलेगा आधुनिक कृषि का लाभ

By Dec 8, 2025

गोपालगंज में कृषि विभाग किसानों की सहूलियत के लिए एक महत्वपूर्ण योजना को फिर से जीवित करने की तैयारी में है। वर्षों से फाइलों में बंद पड़ी एग्री क्लीनिक योजना को पुनर्जीवित किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना और उनकी आय को बढ़ाना है।

यह योजना नई नहीं है। सरकार ने चार साल पहले ही एग्री क्लीनिक खोलने की पहल की थी, लेकिन जिले में यह योजना अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी और फाइलों में ही दबी रह गई। इसका मुख्य कारण कृषि स्नातकों को इस योजना के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना और उन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन न मिलना रहा। अब एक बार फिर इस योजना को फाइलों से बाहर निकाला गया है और इसे धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है।

कृषि विभाग अब कृषि स्नातकों को एग्री क्लीनिक खोलने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उन्हें इस योजना से किसानों को होने वाले लाभों और सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। उम्मीद है कि इस पहल से अधिक से अधिक कृषि स्नातक आगे आएंगे और जिले में एग्री क्लीनिक खोलकर किसानों की मदद करेंगे।

सरकार खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। बीज अनुदान, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, फसल क्षतिपूर्ति अनुदान, फसल बीमा और किसान सम्मान योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसी कड़ी में एग्री क्लीनिक योजना को भी सक्रिय किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी।

डीडीएम नावार्ड के अनुसार, एग्री क्लीनिक खुलने से किसानों को चौतरफा लाभ मिलेगा। इन क्लीनिकों के माध्यम से किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा सकेंगे, जिससे पता चलेगा कि कौन सी फसल उनके खेत के लिए सबसे उपयुक्त है। इसके अलावा, उन्हें उन्नत तरीके से फसल लगाने की विधियों, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल कटाई के उपरांत उपज के भंडारण और सबसे महत्वपूर्ण, अपनी उपज की बेहतर मार्केटिंग के बारे में भी जानकारी मिलेगी। यह सब जानकारी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

सरकार एग्री क्लीनिक खोलने वाले कृषि स्नातकों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है। योजना के तहत, महिला और अनुसूचित जाति-जनजाति के कृषि स्नातकों को क्लिनिक स्थापित करने के लिए 44 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। वहीं, सामान्य वर्ग के कृषि स्नातकों को 36 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। यह अनुदान उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने में एक बड़ी मदद साबित होगा।

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