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महिला अस्पताल में फिर सक्रिय हुए ‘बच्चा चोर’ दलाल, नवजात बच्चों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

By Dec 7, 2025

बदायूं के महिला अस्पताल में एक बार फिर ‘बच्चा चोर’ दलालों का गिरोह सक्रिय हो गया है, जिससे नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उसहैत इलाके से बालिका अपहरण के मामले में जेल जा चुके और जमानत पर छूटे ये दलाल फिर से अस्पताल परिसर में डेरा जमाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये महिलाएं गर्भवती महिलाओं और उनके तीमारदारों को बहला-फुसलाकर अस्पताल से निकालकर निजी अस्पतालों में भर्ती करा रही हैं, जिसके एवज में उन्हें मोटी कमीशन मिलती है।nnयह गिरोह वर्षों से इस गोरखधंधे में लिप्त है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के चलते कुछ सदस्य जेल भी गए, लेकिन जमानत पर बाहर आते ही उन्होंने अपना पुराना धंधा फिर से शुरू कर दिया है। इन दलालों का मुख्य काम अस्पताल आने वाले मरीजों को अपने जाल में फंसाना और उन्हें निजी अस्पतालों में ले जाना है। यह खेल लंबे समय से चल रहा है, और कई निजी अस्पताल इसी रैकेट के सहारे चल रहे हैं।nnसूत्रों का कहना है कि ये दलाल मरीज को रेफर करने के लिए निजी अस्पतालों से एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक का कमीशन लेते हैं। इसी लालच में वे दिन भर अस्पताल में सक्रिय रहते हैं। यही नहीं, यह गिरोह पहले भी नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पांच से आठ लाख रुपये तक में नवजात बच्चों को बेचा था। पिछले साल मार्च 2025 में, जब उन्हें अस्पताल से कोई बच्चा नहीं मिला, तो उन्होंने उसहैत थाना क्षेत्र के गांव कड्डी नगला से डेढ़ साल की बालिका प्रभा का अपहरण कर लिया था।nnइस मामले में कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव पड़ौलिया निवासी अमनपाल, सखानू के वार्ड नंबर एक निवासी सागर कुमार, सहसवान कोतवाली क्षेत्र के गांव खंदक निवासी यशपाल उर्फ यश, शिवपुरम निवासी गायत्री, छोटी और नेकपुर निवासी कुसुमा सहित कई आरोपी पकड़े गए थे। अमन पाल और सागर कुमार को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में, गिरोह की महिला सदस्यों को जमानत मिली है, जिसके बाद उन्होंने फिर से महिला अस्पताल में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।nnगिरोह के सरगना यशपाल उर्फ यश समेत सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। उसहैत से अगवा की गई बालिका प्रभा को भी चार लाख रुपये में बेचने की योजना थी, लेकिन मामला सुर्खियों में आने के कारण सौदा नहीं हो पाया और अंततः आरोपियों को बालिका को छोड़ना पड़ा। इन दलालों की वापसी से एक बार फिर महिला अस्पताल में भर्ती होने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।”
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