ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री परेशान, गोरखपुर से चलने वाली ट्रेनें घंटों विलंबित
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के साथ ट्रेनों की लेटलतीफी ने रेल यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली-लखनऊ-गोरखपुर-मुजफ्फरपुर रेल रूट पर ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शुक्रवार को बठिंडा-नई दिल्ली-गोरखपुर मार्ग की 12556 नंबर की गोरखधाम एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से आठ घंटे की देरी से गोरखपुर पहुंची। वहीं, गोरखपुर के रास्ते आजमगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) जाने वाली 20104 एलटीटी एक्सप्रेस भी पांच घंटे विलंबित रही।
इन ट्रेनों के लगातार विलंब से चलने के कारण यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर एलटीटी एक्सप्रेस पकड़ने वाले यात्रियों को गोरखपुर जंक्शन पर रात गुजारनी पड़ रही है। सूत्रों के अनुसार, जब से एलटीटी एक्सप्रेस आजमगढ़ से चल रही है, तब से यह नियमित रूप से विलंबित हो रही है, जिससे यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
ठंड के मौसम में कोहरे का प्रकोप बढ़ने के साथ ही ट्रेनों की लेटलतीफी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 19038 नंबर की अवध एक्सप्रेस भी पांच घंटे की देरी से चल रही थी, जिससे गोरखपुर जंक्शन पर यात्रियों को ट्रेन का लंबा इंतजार करना पड़ा। रेलवे प्रशासन ने कोहरे को देखते हुए ट्रेनों की गति को नियंत्रित कर दिया है। फाग सेफ डिवाइस लगी ट्रेनें अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी, जबकि बिना फाग सेफ डिवाइस वाली ट्रेनें 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से संचालित होंगी। घना कोहरा होने पर यह रफ्तार और भी धीमी हो जाएगी।
यात्रियों को यह परेशानी फरवरी महीने तक झेलनी पड़ सकती है। रेलवे प्रशासन ने कोहरे और खराब मौसम को देखते हुए पहले ही 15 फरवरी तक 24 ट्रेनों को निरस्त कर दिया है और 26 ट्रेनों के फेरों को कम कर दिया है। ट्रेनों का निरस्तीकरण और ऊपर से उनका विलंब से चलना यात्रियों के लिए दोहरी मुसीबत बन गया है। सूत्रों का कहना है कि इस स्थिति में ट्रेनों के समय पालन का ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।
