गोरखपुर में सुथनी बनेगा शहर के कचरा प्रबंधन का हब: बायो मेडिकल, ई-कचरा और टायर होंगे रीसायकल
गोरखपुर शहर के सुथनी इलाके में जल्द ही बायो मेडिकल कचरा, ई-कचरा और खराब टायरों के वैज्ञानिक निस्तारण की सुविधा उपलब्ध होगी। इस दिशा में नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर एक आधुनिक कामन बायो मेडिकल वेस्ट प्रोसेसिंग फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किया गया है। इस नई सुविधा के स्थापित होने से शहर के 650 से अधिक अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायो मेडिकल कचरे के निपटान की गंभीर समस्या का स्थायी समाधान मिलेगा, जिससे शहर को स्वच्छ और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
नगर निगम सुथनी में लगभग 40 एकड़ भूमि पर एक इंटीग्रेटेड गार्बेज सिटी विकसित कर रहा है, जिसके तहत यह अत्याधुनिक बायो मेडिकल वेस्ट प्रोसेसिंग सेंटर, टायर वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और ई-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में गोरखपुर में जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, एम्स, आयुष अस्पताल सहित लगभग 650 छोटे-बड़े निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित हैं। इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है, जिसका सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निपटान अत्यंत आवश्यक है। हालांकि कुछ संस्थाएं इसका निस्तारण करती हैं, लेकिन एक बड़ी मात्रा में कचरा अनिस्तारित रह जाता है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। इस नए केंद्रीकृत सुविधा के निर्माण से इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
प्रस्तावित कामन बायो मेडिकल वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण और संचालन निर्माण-स्वामित्व-संचालन (बीओओ) मॉडल पर किया जाएगा। चयनित एजेंसी को शहर के सभी स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों से बायो मेडिकल कचरा एकत्र कर, उसे वैज्ञानिक विधियों से उपचारित कर अंतिम निस्तारण तक पहुंचाना होगा। संयंत्र में रोटरी इन्सिनरेटर, प्लाज़्मा पायरोलिसिस यूनिट, उन्नत एयर पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम, आटोक्लेव, हाइड्रोक्लेव, माइक्रोवेव, श्रेडर जैसी अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, ईटीपी, जीपीएस युक्त कलेक्शन वाहन, सीसीटीवी निगरानी और चिमनी पर ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम भी स्थापित किए जाएंगे।
इसके साथ ही, सुथनी में टायर वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। यह प्लांट बेकार टायरों और प्लास्टिक को उच्च तापमान पर गर्म करके पायरोलिसिस तेल, कार्बन ब्लैक और स्टील जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करेगा। यह न केवल लैंडफिल में टायरों के कचरे को कम करेगा, बल्कि इन सामग्रियों को ईंधन या अन्य उद्योगों के लिए मूल्यवान उत्पादों में पुनर्चक्रित करके पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होगा।
तेजी से बढ़ते ई-कचरे की समस्या से निपटने के लिए ई-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट के माध्यम से बैटरी, सर्किट बोर्ड, मरकरी लैंप जैसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सुरक्षित भंडारण और निस्तारण किया जाएगा। चयनित एजेंसी ई-कचरे के कलेक्शन, सेग्रीगेशन, डिस्मेंटलिंग और रीसाइक्लिंग की जिम्मेदारी संभालेगी। जो सामग्री रीसाइक्लिंग योग्य नहीं होगी, उसे अधिकृत ट्रीटमेंट स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) में भेजा जाएगा। यह इंटीग्रेटेड गार्बेज सिटी गोरखपुर के अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने और शहर को स्वच्छ, स्वस्थ व पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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