समस्तीपुर ब्लड बैंक में हाहाकार: 350 यूनिट की क्षमता, उपलब्ध सिर्फ 15-20 यूनिट
समस्तीपुर जिले के सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। रक्त की भारी कमी के कारण मरीजों को चढ़ाने के लिए पर्याप्त रक्त उपलब्ध नहीं है। 350 यूनिट रक्त रखने की क्षमता वाले इस ब्लड बैंक में वर्तमान में केवल 15 से 20 यूनिट रक्त ही स्टॉक में है, जबकि नियमानुसार 50 से 60 यूनिट रक्त हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए।
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड ग्रुप का एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं है। एक दिसंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पॉजिटिव ग्रुप में भी ए पॉजिटिव की पांच, बी पॉजिटिव की तीन, एबी पॉजिटिव की दो और ओ पॉजिटिव की पांच यूनिट रक्त ही उपलब्ध है। यह स्थिति पिछले लगभग छह महीनों से लगातार बनी हुई है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से रक्तदान शिविरों के आयोजन और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसका अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने स्वीकार किया है कि ब्लड की उपलब्धता काफी कम है और निगेटिव ग्रुप के ब्लड बिल्कुल भी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि रक्त की कमी के कारण किसी मरीज की मौत की सूचना विभाग के पास नहीं है, क्योंकि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया जाता है।
ब्लड बैंक में प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की सुविधा के लिए आवश्यक लाइसेंस का अभाव भी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। इसके लिए ब्लड कंपोनेंट मशीन की आवश्यकता है, जिसके लाइसेंस मिलने के बाद ही डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स और जलने के मरीजों को प्लाज्मा दिया जा सकता है। वर्तमान में, ऐसे गंभीर मरीजों को डीएमसीएच या पीएमसीएच रेफर किया जा रहा है। वीआईपी मरीजों के लिए पटना से व्यवस्था की जाती है, जबकि आम मरीजों को रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
