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गुटखा, सिगरेट पर नया टैक्स: लोकसभा में स्वास्थ्य सुरक्षा उपकर विधेयक पारित

By Dec 6, 2025

लोकसभा में शुक्रवार को स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 ध्वनिमत से पारित हो गया। इस महत्वपूर्ण विधेयक के पारित होने से पान मसाला जैसे उत्पादों के निर्माण पर नया उपकर (सेस) लगाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है, जबकि रक्षा केंद्रीय सूची में आता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की बदलती जरूरतों के अनुरूप रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक संसाधन जुटाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री ने राज्यों को आश्वस्त किया कि इस उपकर से अर्जित राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च के लिए उनके साथ साझा किया जाएगा, जिससे राज्यों को भी वित्तीय सहायता मिलेगी। सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि उपकर लगाने की संवैधानिक शक्ति अनुच्छेद 270 में निहित है, जो संसद को किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए ऐसा उपकर लगाने का अधिकार प्रदान करता है।

इसी सत्र के दौरान, सरकार ने चुनाव आयोग का हवाला देते हुए लोकसभा को सूचित किया कि बिहार में हुए विधानसभा चुनावों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक लिखित उत्तर में बताया कि किसी भी उम्मीदवार या उनके एजेंटों द्वारा पुनर्मतदान के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया था। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों के लिए वीवीपीएटी पर्चियों का अनिवार्य सत्यापन किया गया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की गणना में कहीं भी कोई विसंगति नहीं पाई गई। इसके अलावा, 14 नवंबर को परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी हारने वाले उम्मीदवार से ईवीएम की जांच और सत्यापन के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।

हालांकि, मेघवाल ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग के अनुसार, समस्तीपुर में वीवीपैट पर्चियों के संबंध में बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, सरायरंजन सीट से संबंधित कुछ कटी हुई और कुछ बिना कटी हुई वीवीपैट पर्चियां 8 नवंबर को कूड़े में फेंकी हुई पाई गई थीं। सरकार ने स्पष्ट किया कि ये सभी मामले ईवीएम कमीशनिंग के दौरान किए गए मॉक पोल से संबंधित थे। इस घटना के लिए जिम्मेदार सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के तीन सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया था।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के सभी स्थानांतरण जनहित में और बेहतर न्याय प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए जाते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे स्थानांतरणों के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है।

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