निगम का बजट 500 करोड़ घटा, 15,791 करोड़ की देनदारी का बोझ
एकीकृत निगम के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार, निगमायुक्त ने 2026-27 के लिए बजट अनुमान पेश किया है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 500 करोड़ रुपये की कमी आई है। इस नए बजट का आकार 16,530.50 करोड़ रुपये है, जबकि पिछले वर्ष के लिए संशोधित बजट 16,296 करोड़ रुपये था। निगमायुक्त अश्वनी कुमार ने स्थायी समिति की विशेष बैठक में यह बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि आय के लक्ष्यों को अधिक यथार्थवादी बनाने के कारण यह कटौती की गई है, क्योंकि पूर्व में निर्धारित कुछ आय लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पा रहे थे।
संपत्तिकर से 4,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को घटाकर 3,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है, और कन्वर्जन चार्ज से राजस्व लक्ष्य को 600 करोड़ रुपये से घटाकर 220 करोड़ रुपये कर दिया गया है। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि निगम की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा। इसके बजाय, प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें संपत्तिकर, विज्ञापन और लाइसेंस से होने वाली आय में वृद्धि शामिल है।
सुधारों के क्रम में, निगम ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के तहत महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। अब होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग से हेल्थ ट्रेड लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसे फैक्ट्री लाइसेंस और जनरल ट्रेड लाइसेंस की तरह संपत्तिकर से जोड़ा जाएगा। निगम ने फैक्ट्री लाइसेंस को समाप्त कर दिया है और इसके स्थान पर जमा संपत्तिकर का पांच प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करने पर इसे मान्य माना जाएगा। इसी तरह, जनरल ट्रेड लाइसेंस के लिए भी, संपत्तिकर का 15 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करने पर अलग से लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, हेल्थ लाइसेंस को संपत्तिकर से जोड़ने की प्रक्रिया और इसमें कितना अतिरिक्त संपत्तिकर देना होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इस वित्तीय सुधार के प्रयास के साथ ही, निगमायुक्त ने निगम की गंभीर वित्तीय स्थिति को भी उजागर किया। निगम पर कुल 15,791 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसमें कर्मचारियों के लाभांश और वेतन आयोग के बकायों के रूप में 7009.76 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ठेकेदारों को 520 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। निगम पर 8,262 करोड़ रुपये का भारी ऋण भी बकाया है, जो निगम के वित्तीय बोझ को दर्शाता है।
