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किराए के भवन में पर्यटन विभाग, नए ऑफिस निर्माण में जिला प्राधिकरण की मंजूरी का इंतजार

By Dec 5, 2025

नैनीताल जिले में पर्यटन विभाग की स्थिति ‘दीया तले अंधेरा’ कहावत पर सटीक बैठती है। भले ही यह विभाग जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हो, लेकिन स्थापित होने के इतने वर्षों बाद भी इसके पास अपना कार्यालय भवन नहीं है। यह विडंबना तब और भी गंभीर हो जाती है जब विभाग ने नए कार्यालय भवन निर्माण के लिए भेजे गए प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल चुकी है, और 1.43 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया गया है।

कार्यदायी संस्था के रूप में केएमवीएन को नामित करने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद, निर्माण कार्य जिला विकास प्राधिकरण की स्वीकृति के अभाव में अधर में लटका हुआ है। यह स्थिति तब है जब विभाग को वर्तमान किराए के भवन से बेदखल करने के लिए न्यायालय से तीन साल का नोटिस मिला है, जिसमें से एक साल बीत चुका है।

ब्रिटिशकाल से ही नैनीताल का पर्यटन कारोबार जिले की रीढ़ रहा है। पर्यटन के महत्व को देखते हुए, अविभाजित उत्तर प्रदेश में पहला पर्यटन कार्यालय यहीं खोला गया था। 1957 में मालरोड स्थित एक किराए के भवन में कार्यालय की शुरुआत हुई थी। समय के साथ, रेलवे और परिवहन जैसे अन्य विभागों को अपने कार्यालय मिल गए, लेकिन पर्यटन विभाग आज भी किराए के भवन में ही संचालित हो रहा है।

बीते दो दशकों में कई बार भूमि चयन और प्रस्ताव बनाने की प्रक्रियाएं हुईं, लेकिन विभाग को अपना भवन नसीब नहीं हो सका। 2022 में एक बार फिर प्रक्रिया शुरू हुई और तल्लीताल केएमवीएन आवास गृह के समीप भूमि चयनित कर प्रस्ताव भेजा गया। इस वर्ष शासन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 1.43 करोड़ का बजट आवंटित किया और केएमवीएन को कार्यदायी संस्था बनाया। निविदा प्रक्रिया भी पूरी हो गई, लेकिन जिला विकास प्राधिकरण से निर्माण की स्वीकृति न मिलने के कारण कार्य रुका हुआ है।

वर्तमान में, विभाग मालरोड स्थित एक जर्जर हो चुके किराए के भवन में चल रहा है। भवन स्वामी द्वारा कई बार नोटिस देने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां से तीन साल में भवन खाली कराने का आदेश मिला। अब विभाग के पास केवल दो साल बचे हैं। यदि समय रहते निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह संभावना है कि नैनीताल से पर्यटन कार्यालय को कहीं और स्थानांतरित करना पड़ सकता है, जो जिले के पर्यटन विकास के लिए एक बड़ा झटका होगा।

जिला पर्यटन विकास अधिकारी अतुल भंडारी ने बताया कि कार्यालय भवन निर्माण के लिए बजट उपलब्ध है और भूमि भी चयनित है, लेकिन प्राधिकरण की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिला प्रशासन के साथ वार्ता की जाएगी, जिसके बाद ही निर्माण की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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