5.84 करोड़ भुगतान के बाद भी रोडवेज बसों का बुरा हाल, यात्री परेशान
गाजियाबाद के साहिबाबाद डिपो में यात्रियों को बेहतर रोडवेज बस सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से बसों के रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी फर्म को सौंपी गई थी। बीते नौ महीनों में, डिपो की 146 बसों की देखरेख के लिए इस फर्म को कुल 5.84 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके बावजूद, बसों की स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं दिख रहा है और कई बसें अभी भी रखरखाव के अभाव में डिपो में खड़ी धूल फांक रही हैं।
परिवहन निगम मुख्यालय ने कर्मियों की कमी के चलते बसों के मेंटेनेंस में आ रही दिक्कतों को देखते हुए यह जिम्मेदारी निजी फर्म को सौंपी थी। फरवरी से अब तक फर्म को हर महीने 50 से 80 लाख रुपये के बीच भुगतान किया जा रहा है। लेकिन, नौ महीने बीत जाने के बाद भी वर्तमान में करीब 15 से 20 बसें मेंटेनेंस के लिए डिपो में खड़ी हैं। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि पांच प्रतिशत बसें मेंटेनेंस के लिए खड़ी रह सकती हैं और कुछ बसें अन्य कारणों से भी रुकी हुई हैं।
हालांकि, अधिकारियों ने फर्म द्वारा सेवा में लापरवाही बरतने पर बीते छह महीनों में जुर्माने के तौर पर 14.36 लाख रुपये की कटौती की है। लेकिन, सूत्रों के अनुसार, यह कटौती बसों के खराब होने और रूटों पर न चलने से यात्रियों को हो रही असुविधा और परिवहन निगम को हो रहे राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी साबित हो रही है।
निजी फर्म प्रत्येक बस के रखरखाव के एवज में 5.24 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से शुल्क लेती है। साहिबाबाद डिपो की बसों का रोजाना औसतन 40 से 50 हजार किलोमीटर संचालन होता है, जिसके अनुसार फर्म को करीब ढाई लाख रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। शुरुआत के तीन महीनों की छूट के बाद, बस कम चलने या खराब रहने पर फर्म के बिल से हर माह जुर्माने के रूप में कटौती की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाती है। इसके बावजूद, बसों की खस्ताहालत यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
