यूपी में तीन लाख राशन कार्ड धारक फ्री राशन से हो सकते हैं वंचित, ई-केवाईसी की समय सीमा समाप्त
उत्तर प्रदेश में सरकारी राशन की योजनाओं का लाभ उठाने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। हरदोई जिले में लगभग तीन लाख राशन कार्ड धारकों ने अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। इसके कारण, यह आशंका जताई जा रही है कि ये लोग जल्द ही मुफ्त राशन की सुविधा से वंचित हो सकते हैं। विभाग इस मामले में भारत सरकार से अगले निर्देशों का इंतजार कर रहा है, ताकि इन तीन लाख से अधिक सदस्यों का भविष्य तय हो सके।
केंद्र सरकार द्वारा देशभर में राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राशन कार्ड में दर्ज उन सदस्यों को हटाना था जो या तो मृतक हो चुके हैं या फर्जी तरीके से जोड़े गए थे। साथ ही, ऐसे सदस्यों को भी सूची से बाहर किया जाना था जिन्हें अब राशन की आवश्यकता नहीं है। इस प्रक्रिया के तहत, अंत्योदय कार्ड धारकों को 35 किलोग्राम और पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों को प्रति यूनिट पांच किलोग्राम राशन मुफ्त दिया जाता है।
विभाग की ओर से ई-केवाईसी कराने की सुविधा सभी राशन की दुकानों पर उपलब्ध कराई गई थी। कार्ड धारकों को यह छूट भी दी गई थी कि वे अपने जिले के अलावा किसी अन्य जिले की राशन की दुकान से भी अपनी ई-केवाईसी करा सकते हैं। भारत सरकार ने सितंबर माह से बिना ई-केवाईसी वाले लाभार्थियों का राशन वितरण रोकना शुरू कर दिया था और तीन महीने का अतिरिक्त समय भी दिया था। इस अवधि में ई-केवाईसी कराने वाले सदस्यों को अगले माह से राशन मिलना जारी रहता।
निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी, हरदोई जिले में 3,04,694 सदस्यों ने ई-केवाईसी पूरी नहीं कराई है। जिले के कुल 31,30,643 सदस्यों में से केवल 27,91,754 सदस्यों ने ही यह प्रक्रिया संपन्न की है। ऐसे सदस्य जिन्होंने ई-केवाईसी नहीं कराई है, वे या तो फर्जी हो सकते हैं या फिर वे अब राशन योजना का लाभ नहीं लेना चाहते। विभाग के पास इन सदस्यों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। ऐसे सदस्यों को राशन कार्ड की सूची से बाहर किया जा सकता है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने इस संबंध में बताया है कि अभी तक बिना ई-केवाईसी वाले सदस्यों के बारे में कोई विशेष दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। विभागीय निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ई-केवाईसी न कराने वाले सदस्यों के भविष्य को लेकर कोई भी स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया है, जिससे लाभार्थियों में अनिश्चितता बनी हुई है।
