जीएसटी नोटिस अब रजिस्टर्ड डाक से भी, मद्रास हाई कोर्ट का अहम फैसला
मद्रास हाई कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि बकाया कर की वसूली के लिए केवल ई-मेल के माध्यम से नोटिस भेजना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित कारोबारी को रजिस्टर्ड डाक से भी नोटिस की हार्ड कॉपी भेजी जानी चाहिए। यह फैसला चेन्नई की एक कंपनी टीवीएल एटी साबुथामस कांट्रेक्टर के मामले में आया, जहां ई-मेल पर नोटिस भेजने के बाद जवाब न मिलने पर कंपनी पर अर्थदंड लगाया गया था।
इस फैसले से देशभर के कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में जीएसटी अधिकारी पुराने बकायों की वसूली के लिए ई-मेल का सहारा ले रहे हैं और जवाब न मिलने पर कारोबारियों के बैंक खाते या दुकानें सीज कर रहे हैं। कई मामलों में यह पाया गया है कि कारोबारी इन नोटिसों से अनभिज्ञ थे क्योंकि वे अक्सर सीए या वकील की ईमेल आईडी का उपयोग करते हैं, या फिर कारोबारी व्यस्तता के कारण ई-मेल पर ध्यान नहीं दे पाते।
टैक्स सलाहकारों के अनुसार, मद्रास हाई कोर्ट का यह निर्णय जीएसटी प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देगा। मर्चेंट्स चैंबर की जीएसटी कमेटी के सलाहकार धर्मेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजने से यह सुनिश्चित होगा कि कारोबारी को सूचना प्राप्त हुई है। इससे अनावश्यक रूप से बैंक खाते सीज करने या दुकानें बंद कराने की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि सिर्फ ई-मेल भेजकर अपनी औपचारिकता पूरी करना। यदि सूचना कारोबारी तक पहुंच जाती है, तो वह स्वयं ही विभाग को जवाब देगा, जिससे विवाद स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे।
यह कदम उन छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों के लिए विशेष रूप से सहायक होगा जो अक्सर तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बारीकियों से अनजान होते हैं। पिछले एक साल में, राज्य कर विभाग वैट और जीएसटी के पुराने बकायों की वसूली में अधिक सख्ती बरत रहा है, जिससे कई कारोबारी परेशान हैं। ऐसे में, यह न्यायिक हस्तक्षेप उन्हें न्यायसंगत अवसर प्रदान करेगा।
