गीता जयंती पर 18 अध्यायों का पाठ, श्रद्धालुओं ने किया गीता दान
मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, पर कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ (इस्कॉन) मंदिर में गीता जयंती का भव्य उत्सव मनाया गया। लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व इसी एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को श्रीमद्भगवत गीता का उपदेश दिया था, जो संयमित जीवन, कर्मप्रधानता और आत्मज्ञान का सार है। इसी पावन उपलक्ष्य में मंदिर में विशेष आयोजन किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘हरे राम-हरे कृष्णा’ महामंत्र के संकीर्तन से हुई, जिसके उपरांत भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और बलभद्र को लाल रंग की नवीन पोशाकों से सुसज्जित कर भव्य फूल बंगला सजाया गया। संध्या काल में, श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति भाव से गीता के 18 अध्यायों के श्लोकों का संस्कृत में सामूहिक पाठ किया। इस दौरान वातावरण भक्तिमय हो गया और सभी ने गीता के ज्ञान को आत्मसात करने का प्रयास किया।
श्रीजगन्नाथ मंदिर के अध्यक्ष अरविंद प्रभु ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गीता का ज्ञान केवल कर्म करने की प्रेरणा ही नहीं देता, बल्कि जीवन को अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण बनाने का मार्ग भी दिखाता है। उन्होंने मोक्षदा एकादशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह वही दिन है जब मोक्ष प्रदान करने वाली भगवत गीता का अवतरण हुआ था।
इस पावन अवसर पर, श्रद्धालुओं ने नई पीढ़ी को धर्म और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करने के उद्देश्य से श्रीमद्भगवत गीता का दान भी किया। यह पहल नई पीढ़ी को गीता के अनमोल उपदेशों से जोड़ने और उन्हें नैतिक मूल्यों से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर शैलेन्द्र अग्रवाल, कामता प्रसाद अग्रवाल, आशु मित्तल, सुशील अग्रवाल, सुनील मनचंदा, संजीव मित्तल, संजीव बंसल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश अग्रवाल, हरिदास, अदिति गौरांगी, शाश्वत नन्दलाल, ज्योति बंसल, संजय कुकरेजा सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
