जेंटामाइसिन इंजेक्शन की घटिया क्वालिटी पर यूपी में रोक, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जेंटामाइसिन इंजेक्शन की घटिया गुणवत्ता का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। मुरादाबाद के जिला अस्पताल में मरीजों को दिए जा रहे इस इंजेक्शन की जांच में फेल होने की रिपोर्ट के बाद, राज्य भर के सभी अस्पतालों में इसके उपयोग और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह इंजेक्शन उत्तराखंड की एक कंपनी, मेसर्स जेपीईई ड्रग्स द्वारा निर्मित किया जा रहा था। मुरादाबाद के जिला मजिस्ट्रेट से मिली रिपोर्ट और विभिन्न परीक्षणों के नतीजों के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। यह फैसला मरीजों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है, क्योंकि घटिया गुणवत्ता वाला इंजेक्शन न केवल अप्रभावी हो सकता है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर सकता है।
जेंटामाइसिन एक महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक है जिसका उपयोग गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिए किया जाता है, खासकर उन मामलों में जहां अन्य दवाएं प्रभावी नहीं होतीं। यह बैक्टीरिया को मारकर या उनकी वृद्धि को रोककर काम करता है। इसके उपयोग में मूत्र पथ संक्रमण, हड्डियों और जोड़ों के संक्रमण, निमोनिया, मेनिनजाइटिस, सेप्सिस और अन्य गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण शामिल हैं। इस इंजेक्शन की गुणवत्ता पर सवाल उठने से स्वास्थ्य विभाग में चिंता की लहर दौड़ गई है।
अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटिया दवाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस मामले की आगे की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और प्रदेश में केवल उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं ही मरीजों तक पहुंचे।
