गोरखपुर दोहरा हत्याकांड: परिचित पर पुलिस का शक, सबूतों की तलाश जारी
गोरखपुर में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन पुलिस अभी भी हत्यारे की पहचान को लेकर अंधेरे में है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल पर मिले सुरागों ने पुलिस को हत्यारे के संभावित प्रोफाइल का अंदाजा तो दिया है, पर असली कातिल कौन है, इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है। पुलिस का शक घर के किसी परिचित चेहरे पर जा रहा है, लेकिन पुख्ता सबूतों के अभाव में जांच फिलहाल धीमी गति से चल रही है।
जांच की पांच प्रमुख उलझनें पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। घटनास्थल और रामा फर्नीचर की दुकान पर काम करने वाले लोगों से पूछताछ के बावजूद कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मां शांति जायसवाल पर तीन गहरे वार किए गए थे, जबकि विमला के सिर के पीछे एक ही वार किया गया, जिससे यह अंदेशा है कि उस पर पीछे से अचानक हमला किया गया। इस पैटर्न से पुलिस ने यह निष्कर्ष निकाला है कि हत्यारा शारीरिक रूप से मजबूत, सुनियोजित और शांत दिमाग वाला व्यक्ति हो सकता है।
हत्यारे के सामने के दरवाजे से आसानी से प्रवेश करने और उसी रास्ते से निकलने की बात इस शक को और पुख्ता करती है कि वह घर का कोई परिचित था। कोई अनजान व्यक्ति इस तरह से घर में बिना किसी शक के प्रवेश नहीं कर सकता था। पुलिस के अनुसार, यह व्यक्ति घर के आसपास रहने वाला, परिवार का परिचित या लंबे समय से उन्हें जानने वाला हो सकता है।
जांच में सबसे बड़ी बाधा सीसीटीवी फुटेज में हत्यारे के स्पष्ट चेहरे का न दिखना है। गली में कैमरे न होने और दूर लगे कैमरों की फुटेज में केवल धुंधली आकृतियां नजर आ रही हैं। दूसरी उलझन मृतक सुशीला के बयानों में बार-बार आ रहे विरोधाभास हैं, जो समझौते की तारीख, रकम और वर्ष को लेकर अलग-अलग जानकारी दे रही हैं। तीसरी समस्या संदिग्धों की लंबी सूची है। ई-रिक्शा चालक और चाऊमिन विक्रेता सहित कई लोगों से पूछताछ के बाद भी कोई प्रमाण न मिलने पर उन्हें छोड़ना पड़ा। अब दो नए लोगों से पूछताछ चल रही है, लेकिन उनके खिलाफ भी कोई सीधा सबूत नहीं है।
घर में संघर्ष के कम निशान मिलना और वार का बेहद सटीक होना भी पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। क्या हत्यारा पहले से घर में मौजूद था? क्या मां-बेटी ने उसे पहचान लिया था? इन सवालों के जवाब तकनीकी साक्ष्यों के बिना मिलना मुश्किल है। पांचवीं और सबसे चौंकाने वाली बात 15 साल पुराना एक नाबालिग को भगाने का मामला है, जिसमें शांति और विमला जेल गई थीं और वह लड़की आज तक घर नहीं लौटी। पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है, लेकिन इतने पुराने मामले को वर्तमान वारदात से जोड़ना आसान नहीं है।
इन सभी अड़चनों के बावजूद, पुलिस का दावा है कि जल्द ही हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कॉल डिटेल और घटनास्थल के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों की सूची तैयार कर ली गई है। अब पुलिस की पूरी उम्मीद इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी है, जिनसे इस दोहरे हत्याकांड की परतें कड़ियां जुड़ सकें।
