हत्या में उम्रकैद सामान्य सजा, फांसी की मांग पर मोहाली कोर्ट की अहम टिप्पणी
मोहाली सेशन्स कोर्ट ने बलौंगी थाना क्षेत्र में राजबीर की निर्मम हत्या के दोषी अजय को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस फैसले के साथ यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की कि हत्या के अपराध में सामान्य सजा आजीवन कारावास ही होती है, और मौत की सजा केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं थीं।
अदालत ने दोषी अजय पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर उसे अतिरिक्त छह महीने की कैद भुगतनी होगी। इस मामले में 7 फरवरी 2023 को बलौंगी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। अजय पर आरोप था कि उसने राजबीर की निर्मम तरीके से हत्या की है। मामला खरड़ के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत से कमिट होने के बाद सेशन्स कोर्ट में चला, जहाँ 26 नवंबर 2025 को अदालत ने अजय को दोषी करार दिया था।
अभियोजन पक्ष की ओर से पंजाब सरकार के लोक अभियोजक और मृतक राजबीर के वकील ने अजय के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। उन्होंने दलील दी कि अजय ने अत्यंत क्रूरता से राजबीर की हत्या की है और वह समाज के लिए खतरा है।
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से लीगल एड डिफेंस काउंसिल एडवोकेट ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने बताया कि अजय पहली बार अपराध कर रहा है (फर्स्ट ऑफेंडर) और वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है। उसके बुजुर्ग माता-पिता हैं जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी उस पर है, साथ ही उसकी एक छोटी अविवाहित बहन भी है जिसका पूरा भार उसी पर है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश ने कहा कि मौत की सजा तभी दी जा सकती है जब मामला ‘सबसे दुर्लभ में दुर्लभ’ (रेरेस्ट ऑफ रेयर) की श्रेणी में आए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारतीय कानून के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास ही सामान्य सजा है। मौत की सजा का प्रावधान केवल उन अत्यंत जघन्य अपराधों के लिए है जो समाज की अंतरात्मा को झकझोर देते हैं और जहाँ अपराधी में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। इस मामले में ऐसी असाधारण परिस्थितियाँ मौजूद नहीं पाई गईं।
